आगरा, जागरण संवाददाता। मैच से पहले पूनम के हाथ में चोट लग गई थी। डर था कि कहीं उसके प्रदर्शन पर इसका असर न पड़े पर उसने बेहतर खेल दिखाया। पूनम ही नहीं टीम में सभी बेटी अच्छा खेली। मुझे पूरी उम्मीद है कि इस बार टीम वर्ल्ड कप लाएगी। यह खुशी व्‍यक्‍त की है आगरा की बिटिया और भारतीय महिला क्रिकेट की शान पूनम यादव की मां मुन्‍ना देवी का। अपनी बेटी पर नाज ि‍सिर्फ मां को ही नहीं है बल्कि पूरा परिवार ही पूनम की प्रतिभा की रोशनी को पूर्णिमा के चांद की भांति समझता है। पूनम ने शुक्रवार को अपने प्रदर्शन से अपनी चमक की आभा भी खूब साबित की थी।

उनका इसमें भरपूर साथ दिया आगरा की ही दूसरी प्रतिभावान बेटी दीप्ति शर्मा ने। दोनों के खेल के दम पर भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने ऑस्‍ट्रेलिया की टीम को मात दी।

आस्ट्रेलिया में शुक्रवार से शुरू हुए महिला क्रिकेट वर्ल्डकप के पहले ही मैच में आस्ट्रेलिया को भारतीय टीम ने पूनम और दीप्ति के दम पर 17 रन से शिकस्त दी थी। आस्ट्रेलिया में शुक्रवार से महिला टी-20 क्रिकेट वर्ल्‍ड कप का आगाज हुआ। पहले ही मैच में ताजनगरी की पूनम और दीप्ति ने भारतीय टीम को शानदार जीत दिलाई। बल्लेबाजी में जहां भारतीय टीम की बड़ी बल्लेबाज स्मृति मंधाना और शेफाली जल्दी आउट हो गईं तो दीप्ति ने 46 बाल पर 49 रन की पारी खेलकर टीम को 132 रन के स्कोर तक पहुंचाया। इसके बाद पूनम ने कमाल ही कर दिया। पूनम ने चार ओवर के अपने स्पेल में मात्र 19 रन देकर आस्ट्रेलिया के महत्वपूर्ण चार विकेट झटके। पूनम को वूमेन ऑफ द मैच चुना गया। वहीं दीप्ति ने गेंदबाजी में भी कमाल किया। चार ओवर के अपने स्पेल में मात्र 17 रन ही दिए। आस्ट्रेलिया टीम को 115 रन पर रोकने में महत्वपूर्ण रोल निभाया। पूनम और दीप्ति के अच्छे प्रदर्शन पर ताजनगरी में परिजन व क्रिकेट प्रेमियों ने खुशी जाहिर की।

पूनम और 24 नंबर की जर्सी का नाता

वर्ल्‍ड कप के पहले ही मैच में कोहराम मचाने वाली पूनम का जन्म 24 अगस्त 1991 को हुआ था और इसी वजह से वह 24 नंबर की जर्सी भी पहनती हैं। पूनम के पिता रघुवीर सिंह रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर हैं। आज भी टॉम बॉय की तरह रहने वाली पूनम बचपन में भी लड़कों की तरह रहती थी। उन्हीं की तरह कपड़े पहनना और लड़कों के साथ ही क्रिकेट खेलती थीं।

घर से की थी बगावत

पूनम यादव ने आठ साल की उम्र में स्टेडियम जाना शुरू किया था। मगर समाज के अधिक दबाव के कारण उनके पिता ने उन्हें क्रिकेट खेलने से मना कर दिया। लेकिन क्रिकेट तो पूनम की हर सांस में बसता था। इसीलिए एक दिन वो पिता को बिना बताए ही स्टेडियम के लिए घर से चली गई और कोच हेमलता काला के साथ घर लौटीं। जिससे कोच उनके पिता को मना सके और वो इसमें सफल भी हो गई थीं। इसके बाद पूनम ने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्हें भेदभाव का भी काफी सामना करना पड़ा था। अक्सर उनके आस पास के लोग यही कहते थे कि कैसे एक लड़की क्रिकेट खेल सकती है और कैसे एक लड़की देर रात घर आ सकती है। मगर पूनम ने इस फालतू की बकवास पर ध्यान नहीं दिया और अपने सपने को पूरा करने के लिए डटी रहीं।

ऐसे खेली गई शानदार पारी

बल्लेबाजी का न्यौता मिलने के बाद भारतीय टीम शानदार शुरुआत के बावजूद चार विकेट पर 132 रन का स्कोर ही बना सकी थी, लेकिन लेग स्पिनर पूनम और मध्यम गति की गेंदबाज शिखा ने भारतीय टीम को बेहतरीन वापसी दिलाई और ऑस्ट्रेलिया को 19.5 ओवर में 115 रन पर समेटने में अहम भूमिका निभाई।

भारतीय गेंदबाजों के दबदबे का इतना असर था कि मेजबान टीम की केवल दो खिलाड़ी ही दोहरे अंक तक पहुंच सकीं। सलामी बल्लेबाज एलिसा हीली ने 35 गेंदों पर छह चौके और एक छक्के से 51 रन की पारी खेली, जबकि एश्ले गार्डनर ने 36 गेंदों पर 34 रन बनाए। पूनम यादव ने अपनी फिरकी का जादू बिखरते हुए हीली के अलावा रशेल हैंस (06), एलिसे पैरी (00) और जेस जोनासन (02) के विकेट निकाले।

 

Posted By: Tanu Gupta

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