आगरा, यशपाल चौहान। दुनिया पानी को लेकर तीसरे विश्वयुद्ध और विनाशकारी परमाणु युद्ध की चिंता में डूबी है और इधर आभासी दुनिया में साइबर वार छिड़ गया। हर घर इसका शिकार बना है और इंटरनेट युद्धक्षेत्र में तब्दील हो गया है। सेल्फी, इयर फोन और कालिंग व्हाइल ड्राइविंग के चक्कर में होने वाली रोजाना मौतों का आंकड़ा किसी भी युद्धरत देश में होने वाली मौतों के आंकड़े से कम नहीं। जबकि, स्मार्ट फोन ने आभासी दुनिया के सोशल एविल के रूप में पहचान बनानी शुरू कर दी है।

आभासी दुनिया में सोशल संपर्क के माध्यमों का इस्तेमाल एंटी सोशल एक्टिविटी के लिए तेजी से बढ़ रहा है। आगरा में हाल के दिनों में प्रकाश में आई कुछ घटनाएं इसी ओर इशारा कर रही हैं। अब ईष्र्या या विद्वेषवश एक दूसरे को सबक सिखाने या चरित्र हनन के लिए भी लोग सोशल माध्यमों का दुरुपयोग कर रहे हैं। साइबर सेल में ऐसे मामलों की संख्या इधर लगातार बढ़ी है।

अभी तीन दिन पहले शहर के एक प्रतिष्ठित पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाली सातवीं कक्षा की दो 13 वर्षीय छात्रओं की कहानी चौंकाने वाली है। एक छात्र ने दूसरी के फेसबुक प्रोफाइल में प्रोफेशन के आगे कॉलगर्ल लिखकर सिर्फ इसलिए बदनाम करने की कोशिश की क्योंकि उसने टीचर से उसके मोबाइल फोन एडिक्शन की शिकायत की थी। मामला साइबर सेल गया तो खुला, जबकि पीड़ित छात्र और उसके परिजनों को भी उम्मीद नहीं थी कि कच्ची उम्र के बच्चे इस तरह की घटिया हरकतें कर सकते हैं। अब आइजी ए सतीश गणोश ने मामले में मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

दूसरा मामला लोहामंडी क्षेत्र का था। एक उद्यमी की बेटी के नाम से फेसबुक पर पोर्न पेज बनाकर बदनाम किया गया। साइबर सेल की जांच में मामला खुला तो पूर्व कर्मचारी और कांट्रेक्टर की पत्‍नी का हाथ निकला। जांच के बाद आरोपित लोहामंडी निवासी अयूब जेल चला गया। अभी फेसबुक पेज बनवाने वाली महिला जांच के दायरे में है। ये दो मामले तो उदाहरण मात्र हैं। साइबर सेल में बीस दिन में इस तरह के चार मामले आ चुके हैं।

ये भी हैं मामले

- सदर क्षेत्र के बुंदू कटरा में एक असफल प्रेमी ने पांच दिन पहले फेसबुक और वाट्सएप पर युवती को बदनाम किया। उसको लेकर आपत्तिजनक पोस्ट किए और अपने साथ फोटो भी डाला। आरोपित के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया।

- सदर क्षेत्र में एक अधिकारी की प}ी को लेकर उनकी कॉलेज फ्रेंड ने अपमानजनक पोस्ट डाल दी। कई अन्य दोस्तों के लिए भी इसी तरह की पोस्ट डाली गई। अधिकारी ने इसकी शिकायत सदर थाने में की है।

लचर हैं साइबर कानून, जागरूकता का अभाव

सोशल मीडिया पर एक दूसरे को बदनाम करने को आपत्तिजनक पोस्ट डालना या छेड़छाड़ कर फोटो डालना आइटी एक्ट की धारा 66डी/67 के तहत अपराध है। इसमें तीन से पांच साल तक जेल हो सकती है। लेकिन, लोगों को स्मार्ट फोन या कंप्यूटर पर सक्रिय रहते समय यह पता ही नहीं होता कि वे कानून की निगाह में हैं। इनटालरेंस बढ़ रहा है। साइबर एक्सपर्ट रक्षित टंडन मानते हैं कि एक तो साइबर कानून ही काफी लचर हैं। दूसरे, लोगों में जागरूकता का स्तर काफी कम है। जरूरत इस बात की है कि स्कूल-कॉलेज स्तर पर ही लोगों को अच्छा नेटीजन बनने और साइबर कानूनों के संबंध में कार्यशालाएं आयोजित कर लोगों को जागरूक किया जाए। तभी कुछ सुधारात्मक बदलाव की उम्मीद की जा सकती है।

समाज के लिए बुरा संकेत

सोशल मीडिया के बढ़ते प्रयोग से समाज में बदलाव आ रहा है। कई लोग सोचते हैं कि वे दूसरे को बदनाम कर देंगे और किसी को पता नहीं चलेगा, लेकिन ऐसा है नहीं। यह प्रवृत्ति सुशिक्षित समाज के लिए बुरा संकेत है।

प्रो. ब्रजेश चंद्रा, पूर्व निदेशक समाज विज्ञान संस्थान

 

Posted By: Tanu Gupta

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