आगरा, जागरण संवाददाता। उप्र माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (यूपी बोर्ड) की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा का काउंटडाउन शुरू हो चुुुका है। जिले से इसमें शामिल होने वाले एक लाख 20 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों को हर समय सिर्फ इसका नया कार्यक्रम घोषित होने का इंतजार है।

20 मई को माध्यमिक शिक्षा मंत्री यानि डिप्टी सीएम डा. दिनेश शर्मा यूपी बोर्ड अधिकारियों के साथ मंत्रणा कर परीक्षा की अगली संभावित तारीख पर मंथन करेंगे। इसके बाद उसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास संस्तुति के लिए भेजा जाएगा, वहां से ओके की रिपोर्ट मिलते ही बोर्ड संशोधित परीक्षा कार्यक्रम घोषित कर देगा। हालांकि प्रक्रिया बेहद आसान लग रही है, लेकिन ऐसा होगा या नहीं, फिलहाल के हालात को देखकर कहना संभव नहीं। वर्तमान में कोरोना संक्रमण में कमी जरूर आई है, लेकिन गंभीर मरीजों के सामने आने का सिलसिला लगातार जारी है। कोरोना की संभावित तीसरी लहर की आशंका भी सिर पर है, ऐसे में बोर्ड परीक्षा जून में होंगी। ऐसा नहीं लगता।

यह भी है कारण

प्रधानाचार्य परिषद के प्रांतीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष व आरबीएस इंटर कालेज के प्रधानाचार्य डा. यतेंद्र पाल सिंह का कहना है कि वर्तमान में संक्रमण खत्म नहीं हुआ है। इसका प्रसार ग्रामीण क्षेत्रों तक हो चुका है। बोर्ड ने परीक्षा केंद्रों की संख्या सीमित रखी है, जिस कारण केंद्रों पर विद्यार्थियों की भारी संख्या है। ऐसे में परीक्षा वर्तमान संसाधनों में कराई गई, तो वही हाल होगा, जो पंचायत चुनाव में देखने को मिला। हजारों कर्मचारी और शिक्षक संक्रमित हुए और सैंकड़ों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। बोर्ड परीक्षा में शारीरिक दूर के नियमों का पालन नहीं हुआ, तो स्थिति विस्फोटक हो सकती है।

मूल्यांकन भी होगा चुनौती

माध्यमिक शिक्षक संघ पांडेय गुट के युवा प्रकोष्ठ प्रदेश अध्यक्ष डा. भोज कुमार शर्मा का कहना है कि बोर्ड की प्रयोगात्मक परीक्षाएं अभी संपन्न नहीं हो सकी हैं। संक्रमण की ऐसी स्थिति में बोर्ड परीक्षा कराना और फिर उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कराना एक साथ संभव नहीं होगा। ऐसे में परीक्षा कराने के लिए पहले संसाधन बढ़ाने होंगे और मूल्यांकन के लिए भी सुरक्षित टूल इजाद करना होगा।