आगरा, जागरण संवाददाता। हे ईश्‍वर, ऐसा किसी और दूसरे के साथ न हो अब। हालात विपरीत हैं और इंसानों में घबराहट बहुत ज्‍यादा। कोरोना से जंग को देश में लॉकडाउन होने के बाद शहरों से मजदूर अपने गांवों के लिए पैदल ही निकल रहे हैं। दिल्ली में खाने का संकट होने पर मध्यप्रदेश में अपने गांव को पैदल निकले मजदूर की शनिवार सुबह आगरा में सीने के दर्द के बाद मौत हो गई। कोरोना से जंग में पैदल अपने घर निकले मजदूर की मौत का यह पहला मामला सामने आने के बाद प्रशासन में खलबली मच गई है। अब भी हाईवे पर हजारों मजदूर पैदल अपने घरों को निकल रहे हैं। आगरा से जुड़े राज्‍यों के संपर्क मार्गों पर काफिला लगातार बना हुआ है। एक मजदूर की मौत हो जाने के बाद यह एक बड़ा चिंता का विषय बन गया है। हालांकि आगरा में तमाम समाजसेवी और पुलिस घर लौटते इन मजदूरों को भोजन, पानी, चाय और नाश्‍ता उपलब्‍ध कराने में सक्रिय हैं पर पैदल चलते रहने की थकान भी बहुत है।

मुरैना में अंबाह में बड़ का पुरा निवासी 38 वर्षीय रणवीर दिल्ली के तुगलकाबाद में एक रेस्टोरेंट से होम डिलीवरी का काम करता था। लॉकडाउन के बाद रेस्टोरेंट बंद हो गया। वह शुक्रवार को दिल्ली से अपने घर के लिए दो साथियों संजय व एक अन्य के साथ चल दिया। हाईवे पर कहीं किसी वाहन में लटककर थोड़ी दूर का सफर तय किया तो कहीं पैदल ही चलते रहे। शनिवार को सुबह पांच बजे वे आगरा पहुंच गए। सिकंदरा क्षेत्र में कैलाश मोड़ पर गुप्ता हार्डवेयर के सामने पहुंचते ही रणवीर को बेचैनी होने लगी। वह सड़क किनारे बैठ गया। हार्डवेयर शॉप मालिक वहां पर खड़े थे। उन्होंने उसको परेशान देखा तो पास पहुंचे। रणवीर ने उन्हें सीने में दर्द होने की बात कही। उन्होंने सोचा कि पैदल चलने की वजह से हो रहा होगा। दुकान के सामने तिरपाल बिछाकर उन्होंने आराम करने को कह दिया। घर से चाय और बिस्कुट लाकर उसे खिलाए। इसके बाद तबियत बिगड़ती गई। थोड़ी देर में ही मौत हो गई। सुबह साढ़े सात बजे पुलिस वहां पहुंची। मोबाइल के माध्यम से उसकी शिनाख्त हो गई। रणवीर के साले अरविंद सुबह नौ बजे पहुंच गए। अभी पोस्टमार्टम की प्रक्रिया चल रही है। एसएसपी बबलू कुमार ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद युवक की मौत का कारण स्पष्ट होगा।

करना होगा कुछ और भी

नाश्‍ता, खाना, पानी के अलावा आगरा में पुलिस दूसरे राज्‍यों तक पहुंचने के लिए बस तथा अन्‍य वाहन भी उपलब्‍ध करा रही है। संख्‍या हजारों में है। पैदल चलकर आने वालों का क्रम टूट नहीं रहा। लेकिन 150 से 200 किलोमीटर पैदल चल रहे लोगों को कुछ आराम की भी जरूरत है। इस बारे में भी कुछ सोचना होगा। साथ ही इन लोगों को भी ढांढस बंधाए जाने की भी जरूरत है। इनमें बनी घबराहट को दूर के लिए सात्‍वंना भी प्रदान करनी होगी।  

Posted By: Prateek Gupta

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