आगरा(जागरण संवाददाता): खेरिया एयरपोर्ट पर जमीन की खरीद में मुआवजे का मामला अटक गया है। यहां कुछ लोग सर्किल रेट के हिसाब से मुआवजा मांग रहे हैं, जबकि अब तक जिनसे जमीन ली गई हैं, उन्हें कृषि भूमि की दर से मुआवजा दिया गया है। इसके चलते एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआइ) को अभी तक जमीन का हस्तांतरण भी नहीं हो पा रहा है।

ताजनगरी में खेरिया एयरपोर्ट पर 23.32 हेक्टेअर जमीन में सिविल एन्क्लेव के निर्माण को मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग एएआइ और राज्य सरकार के बीच हुआ था। लखनऊ में हुई उच्च स्तरीय बैठक में आबादी वाली जगह को छोड़ते हुए 19.832 हेक्टेअर जमीन एन्क्लेव के लिए खरीदने पर सहमति बनी थी। धनौली, बल्हेरा व अभयपुरा में 19.4888 हेक्टेअर जमीन खरीद ली गई थी और 4500 वर्ग मीटर जमीन अभी खरीदा जाना शेष है। एएआइ ने बड़े एयरक्राफ्ट की पार्किंग को 2.5 एकड़ अतिरिक्त जमीन खरीद की मांग की गई थी, जिसके लिए शासन करीब 18 करोड़ रुपये भी जारी कर चुका है। एन्क्लेव के लिए चहारदीवारी का निर्माण भले ही शुरू हो गया हो, लेकिन जमीन खरीद की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से प्रोजेक्ट में देरी हो सकती है।

दरअसल, अब जो जमीन रह गई है, उसमें लोगों के प्लॉट हैं। वह सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा मांग रहे हैं, जबकि प्रशासन ने अब तक कृषि भूमि के हिसाब से मुआवजा दिया जाता रहा है। इससे बात नहीं बन पा रही है। कुछ लोगों की आधी से अधिक जमीन जा रही है और कुछ बच रही है। रास्ता नहीं होने व एन्क्लेव बनने के बाद पाबंदियों के चलते बची हुई जमीन उनके लिए किसी काम की नहीं रहेगी। इससे वह पूरी जमीन खरीदने की बात कर रहे हैं।

किसान जमीन देने को तैयार

एमओयू के विपरीत एक ओर प्रशासन आबादी की जमीन को खरीद नहीं रहा है, वहीं किसान जमीन देने को तैयार है। आठ किसानों ने जमीन एन्क्लेव के लिए देने का इच्छुक होने का एफीडेबिट दिया है।

एन्क्लेव के लिए आपसी सहमति से जमीन ली जा रही है। कुछ तकनीकी दिक्कतें हैं, जिन्हें दूर किया जा रहा है। जिससे कि किसी के साथ अन्याय नहीं हो।

-रजनीकांत, एसडीएम सदर 'जो जमीन नहीं ली जा रही है, वह भविष्य में एन्क्लेव के विस्तार के लिए चाहिए थी। इसे नहीं लेने से एन्क्लेव निर्माण की योजना पर कोई असर नहीं पड़ेगा।'

-कुसुम दास, निदेशक एएआइ खेरिया एयरपोर्ट

Posted By: Jagran

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