निर्मल बहने वाली चंबल तक पहुंची प्रदूषण की आंच, यमुना की तरह मैला हुआ पानी; मछलियों और मगरमच्छों को भी खतरा
कभी निर्मल बहने वाली चंबल नदी का पानी अब पीने योग्य नहीं रहा है, जिसका रंग बदलकर पीला हो गया ...और पढ़ें

पिनाट में चंबल नदी का पानी पीलेपन पर दिख रहा है।
HighLights
धौलपुर के नालों से प्रदूषण बढ़ रहा है।
घड़ियाल और मगरमच्छों के जीवन को खतरा।
लवकुश पाराशर, पिनाहट। जिस चंबल नदी का जल कभी मिनरल वाटर को भी अपने आगे फीका कर देता था। उसी चंबल का जल अब आचमन योग्य भी नहीं रहा है। पिछले चार-पांच महीने से चंबल नदी के पानी का रंग बदल रहा है। जो कभी नीला दिखाई देता था, वह अब पीला सा होने लगा है। साथ ही यमुना की तरह किनारों से दुर्गंध भी आने लगी है।
पिनाहट और उससे सटे कई गांवों में लोग आज भी पेयजल के लिए चंबल पर ही निर्भर हैं। इस ब्लॉक में कई गांव ऐसे हैं, जो डार्क जोन में हैं। गांवों के लोग कई किलोमीटर पैदल चलकर बर्तनों में नदी का पानी भरकर ले जाते हैं। यही पानी वह पीने के लिए इस्तेमाल करते हैं।
वह अब कतराने लगे हैं। दरअसल कुछ साल पहले तक चंबल का पानी सीधे बर्तन में भरकर पीने योग्य था। धीरे-धीरे पानी का रंग बदलना शुरू हुआ, फिर स्वाद। जानकारों का मानना है कि राजस्थान के धौलपुर के बड़े बड़े नालों का पानी चंबल में छोड़े जाने से नदी का पानी गंदा हो गया है। चंबल का पानी दूषित होने से सरकार की जलीय जीव संरक्षण योजना भी खतरे में पड़ सकती है।
क्योंकि चंबल नदी को घड़ियाल और मगरमच्छों के पालन के लिए सेंचुरी क्षेत्र घोषित किया गया है। इन जलीय जीवों के पालन को सुरक्षित बनाने के लिए खनन पर भी प्रतिबंध लगाया हुआ है। किन्तु चंबल का पानी दूषित होने से तो जलीय जीवों का जीवन ही खतरे में आ जाएगा।
