आगरा(जेएनएन): ¨हदी की बिंदी दुनिया के माथे पर गौरवांवित हो रही है। ¨हदी साहित्य की रसधार विदेशी फिजाओं को भी महका रही है और इसका श्रेय जाता है आगरा के कवि अनिल कुमार शर्मा को।

जून के अंतिम सप्ताह में हिंदी साहित्य संवाद के लिए ऑस्ट्रेलिया गए कवि अनिल कुमार देश की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाई प्रदान कर रहे हैं। अपने प्रवास के तीन माह के दौरान प्रतिदिन उन्होंने ¨हदी साहित्य का प्रचार प्रसार विभिन्न माध्यमों से किया।

मंगलवार को ऑस्ट्रेलिया सिडनी के उपनगर बरीम्बा में अपने पुत्र के निवास पर स्थाई और अल्प-प्रवास पर आए हिंदी साहित्यकारों को साथ लेकर भारत- ऑस्ट्रेलिया साहित्य सेतु का गठन किया। बैठक में तय किया गया कि ऑस्ट्रेलिया में स्थाई रूप से रह रहे व अल्प प्रवास पर आते रहने वाले हिंदी साहित्यकारों के बीच समय समय पर साहित्यिक विचार विमर्श एवं काव्यगोष्ठी दोनों देशों में की जाए।

गोष्ठियों को फेसबुक पर लाइव प्रसारित करने का भी निर्णय लिया गया ताकि दोनों देशों के साहित्य प्रेमी देखकर उसमें सहभागिता कर सकें। बैठक के प्रारम्भ में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और महाकवि नीरज व मोहनलाल अग्रवाल को श्रद्धाजलि दी गई।

कवि अनिल कुमार शर्मा द्वारा गुरु वंदना प्रस्तुत कर गोष्ठी का संचालन करते हुए सभी का काव्यमय स्वागत किया गया।

इसके बाद शुरू हुआ साहित्य संवाद। सिडनी में रहकर इंडियन लिटरेरी एंड आर्ट सोसायटी ऑफ ऑस्ट्रेलिया नामक संस्था की संयोजिका व हिन्दी की कवियत्री रेखा राजवंशी ने गजल दीप रातों में जलाके रखिये.. सुनाकर समा बाधा। कवि अब्बास रजा अल्वी ने गीत पतंग प्रस्तुत किया, जिसे सुनकर सभी के मन में अपनी मातृभूमि की यादें ताजा हो गईं।

बुलंदशहर से सिडनी आ बसे गीतकार विजय कुमार सिंह ने अपने गीत संग्रह संगिनी से एक गीत इतनी जल्दी मत धीरज खो, मत यूं तू हार अभी रे मन सुनाया। देवास से सिडनी अल्प प्रवास पर आए व्यंग्यकार ओम वर्मा जी ने स्वर्ग में कवि सम्मेलन व्यंग के माध्यम से कुछ स्वर्गवासी कवियों की पहचान बन चुकी कविताओं की पैरोडी प्रस्तुत कर दाद पाई। दिल्ली से आईं कथाकार व कवयित्री रेखा द्वेवेदी ने कविता अमलतास सुनाकर प्रकृति से कुछ विंब प्रस्तुत किए। स्थानीय एफएम चैनल दर्पण रेडियो से प्रदीप उपाध्याय ने व्यंग्यकार केपी सक्सेना के व्यंग्य लॉकर का अविकल रूप से मौखिक पाठ किया। सिडनी के सीनियर सिटीजन फोरम के संयोजक देव पासी ने अपने रोचक संस्मरण सुनाए।

स्थानीय हिन्दू समाज के अध्यक्ष विजय, मधु, गिटारवादक मयंक सिंह व सोम्रता सरकार ने संगीत प्रस्तुति देकर सभी का मनोरंजन किया। श्री लंका के अश्रि्वन, स्थानीय भारतीय राकेश माथुर, काता माथुर, फरीदा अल्वी, पुष्पा उपाध्याय, नेहा, श्रेयाश जैन, आंचल व नितिन माटा ने सभी का उत्साहवर्धन किया। आयोजक प्रतिभा शर्मा, जयंत और दृश्या ने आभार व्यक्त किया।

Posted By: Jagran