आगरा, जागरण संवाददाता। एसएन मेडिकल कालेज में व्यवस्थाएं चरमराने लगी हैं। निजी अस्पतालों से मरीजों को गंभीर हालत में मेडिकल कालेज की इमरजेंसी रेफर किया जा रहा है। इससे इमरजेंसी में वेंटीलेटर फुल हो गए हैं, मेडिसिन और टीबी एंड चेस्ट वार्ड में बेड से ज्यादा मरीज भर्ती हैं।

एसएन मेडिकल कालेज में सामान्य दिनों में 700 से 800 मरीज भर्ती हो रहे थे। मगर, कोरोना के केस बढ़ने के बाद निजी अस्पतालों में गंभीर मरीज भर्ती नहीं किए जा रहे हैं। निजी अस्पतालों से मरीजों को मेडिकल कालेज रेफर किया जा रहा है। इससे 40 फीसद मरीज बढ़ गए हैं। इमरजेंसी, मेडिसिन और टीबी एंड चेस्ट डिपार्टमेंट में एक बेड पर दो मरीजों को लिटाना पड़ रहा है। इमरजेंसी के ट्रामा सेंटर में सात वेंटीलेटर हैं, ये सभी फुल हैं। नई सर्जरी बिल्डिग का 24 बेड का आइसीयू फुल है। इमरजेंसी में भर्ती हो रहे मरीजों की कोरोना की जांच कराई जा रही है, इसमें तीन से चार घंटे लग रहे हैं। डाक्टर, जूनियर डाक्टर और कर्मचारी संक्रमित, इलाज पर असर

कोरोना की दूसरी लहर में मेडिकल कालेज के डाक्टर, जूनियर डाक्टर और कर्मचारी सहित 25 लोग संक्रमित हो गए हैं। इससे मरीजों के इलाज पर असर पड़ रहा है। वार्ड में मरीजों की संख्या सीमित की जा रही है। सोमवार से ओपीडी में बदलाव, मेडिसिन की ओपीडी भी एक दिन छोड़कर

मेडिकल कालेज में मेडिसिन और कैंसर रोग विभाग की ओपीडी हर रोज हो रही है। अब इन विभागों की ओपीडी भी एक दिन छोडकर होगी। इमरजेंसी में बढ़ाए जा रहे बेड

मेडिकल कालेज की इमरजेंसी में बेडों की संख्या बढ़ाई जा रही है। अभी 72 बेड हैं, बाल रोग वार्ड में आठ बेड और बढ़ाए जा रहे हैं। ट्राएज ओपीडी के एक हिस्से को वार्ड बनाया जाएगा। ये है हाल

मेडिकल कालेज में बेड - 1200 - 1100 से 1200 मरीज हो रहे भर्ती

मेडिकल कालेज इमरजेंसी - 72 बेड - हर रोज 110 से 120 मरीज हो रहे भर्ती

निजी अस्पताल - 1400 से 1500 बेड - 1000 से अधिक मरीज भर्ती मरीजों की संख्या 40 फीसद तक बढ़ गई है। 1100 से 1200 मरीज भर्ती हैं। गंभीर हालत में निजी अस्पतालों से मरीजों को रेफर किया जा रहा है। ऐसे मरीजों की जान बचाना मुश्किल हो रहा है।

डा. संजय काला, प्राचार्य एसएन मेडिकल कालेज

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