आगरा, जागरण संवाददाता। मुगलों की राजधानी रही फतेहपुर सीकरी स्थित जोधाबाई पैलेस का संरक्षण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) कराएगा। इसके लिए टेंडर किया गया है। यह कार्य छह माह तक चलेगा। इस पर 23 लाख रुपये खर्च होंगे।

फतेहपुर सीकरी का निर्माण मुगल शहंशाह अकबर ने कराया था। वर्ष 1571 से 1585 तक यह मुगल सल्तनत की राजधानी रही। यहां बने कई सुंदर महलों में से एक जोधाबाई पैलेस भी है। समय की मार से जोधाबाई पैलेस में छज्जों के जोड़ खुलने लगे हैं। छत पर ऊपर लगी जाली कई जगहों से टूट गई है। छज्जों के तोड़े खराब हो गए हैं। कुछ जगहों पर दीवारों पर हो रहे पच्चीकारी के पत्थर निकल गए हैं। इसके चलते यहां संरक्षण का प्रस्ताव एएसआइ ने बनाया है। इस दौरान छज्जों की प्वॉइंटिंग, टूटी जाली व तोड़े बदलने और दीवारों से निकले पत्थरों को लगाने का काम किया जाएगा। 16 लाख रुपये मजदूरी और सात लाख रुपये सामग्री पर खर्च होंगे।

अधीक्षण पुरातत्वविद् वसंत कुमार स्वर्णकार ने बताया कि स्मारक के संरक्षण के लिए टेंडर किया गया है।

दरगाह में चल रहा है संरक्षण

फतेहपुर सीकरी में इन दिनों सूफी शेख सलीम चिश्ती की दरगाह में संरक्षण का काम किया जा रहा है। यहां करीब एक दशक पूर्व संगमरमर की बीम में दरार आ गई थी। इस बीम को बदला जाना है, इसके लिए दरगाह की छत को खोला गया है। संगमरमर की बीम आ चुकी है, उसे यहां लगाने की तैयारी है।

शाही दीवार का भी होगा संरक्षण

सीकरी की शाही दीवार का लाल दरवाजा के पास एक बड़ा हिस्सा जुलाई, 2018 में हुई बारिश में गिर गया था। छह मीटर ऊंची और 25 मीटर लंबी दीवार को संरक्षित किया जाएगा। 

Posted By: Tanu Gupta

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