आगरा, जागरण संवाददाता। भगवान भाष्कर अपनी रश्मियों को बिखेरते हुए उदय हो रहे थे और आसमान में लालिमा छाई थी। धवल संगमरमरी हुस्न के सरताज ताजमहल पर उदय होते सूर्य की रश्मियां स्वर्णिम अाभा बिखेर रही थीं। हर ओर छाई हरियाली के बीच भोर में पक्षियों की चहचहाहट मन को सुकून दे रही थी। ऐसे सुरम्य वातावरण में अर्हं योग प्रणेता मुनि प्रणम्य सागर और मुनि चंद्र सागर के सानिध्य में करीब 500 लाेगों ने ऊं अर्हं नम: का जाप करते हुए अर्हं योग साधना की। योग कर शरीर को स्वस्थ रखने और ध्यान कर मन को शांत रखने का प्रशिक्षण प्राप्त किया।

मौका था आगरा दिगंबर जैन परिषद द्वारा रविवार को ताजमहल के पूर्वी गेट स्थित होटल ताज खेमा के टीले पर आयोजित अर्हं-ए-ताज का। आचार्य विद्या सागर महाराज के शिष्य और अर्हं योग प्रणेता मुनि प्रणम्य सागर व मुनि चंद्र सागर मंच पर विराजमान थे और उनके सानिध्य में आगरा और उसके आसपास के जिलों से आए करीब 500 साधक सुबह छह बजे से योग साधना में तल्लीन नजर आए। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी का प्रयास था भाग-दौड़ भरी आज की व्यस्त जीवन-शैली में शरीर को स्वस्थ और मन को शांत रखने को अर्हं योग साधना का अभ्यास करना। ऊं अर्हं नम: का जाप मन को सुकून दे रहा था और वातावरण अध्यात्म मय हो रहा था।

अर्हं योग

मुनि प्रणम्य सागर ने बताया कि अर्हं योग, पांच मुद्राओं पर निर्भर ध्यान योग की प्रक्रिया है। इसमें योग कम और ध्यान योग अधिक है। शरीर के चक्रों को सक्रिय करके रोगों को दूर करने व मानसिक रूप से व्यक्ति को मजबूत बनाने की प्रक्रिया है। यह सिर्फ शारीरिक क्रियाओं का योग नहीं है। इसके जरिए हम अपनी चेतना की शक्ति को महसूस कर सकते हैं। अपनी चेतना की शक्ति से हम अपने मस्तिष्क को व्यवस्थित और रोगों को दूर कर सकते हैं। आज की भाग-दौड़ वाली जिंदगी में तनाव, अवसाद व आत्महत्या के मामलों के बढ़ते ग्राफ को कम करने का इससे बेहतर तरीका नहीं है।

यह रहे मौजूद

आगरा दिगंबर जैन परिषद के अध्यक्ष जगदीश प्रसाद जैन, महामंत्री सुनील जैन, अर्थ मंत्री राकेश जैन, मुख्य संयोजक मनोज कुमर जैन, गौरव जैन, अजय जैन, विक्की जैन, वीरेंद्र कुमार जैन, राजेश जैन, सुदीप जैन, सुभाषचंद जैन, दीपक जैन आदि मौजूद रहे।

Edited By: Prateek Gupta