आगरा, जेएनएन। मई 2010 में कासगंज के पटियाली में दिव्यांग सहायक उपकरण वितरण के फर्जीवाड़े में फंसी पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद की पत्नी एवं पूर्व विधायक लुईस खुर्शीद की अग्रिम जमानत याचिका को जिला जज ने खारिज कर दिया है। उन्होंने माना है कि आर्थिक अपराध के मामलो में अग्रिम जमानत से जांच भी प्रभावित हो सकती है।

बताते चलें डॉ. जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट को भारत सरकार सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा 71.5 लाख रुपये का अनुदान दिया गया था। पटियाली में भी इस धनराशि से मार्च 2010 में दिव्यांगजनों को उपकरण का वितरण दर्शाया गया। आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन द्वारा इस मामले की जांच की गई। जांच के बाद में सन 2017 में फर्रुखाबाद के प्रत्यूष शुक्ल सहित अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस की जांच में संस्था के सचिव अख्तर फारुक निवासी सुखदेव विहार नई दिल्ली एवं प्रोजेक्ट डायरेक्टर पूर्व विधायक लुईस खुर्शीद निवासी कायमगंज फर्रुखाबाद उत्तर प्रदेश निवास गुलमोहर एवेन्यू जामिद नगर नई दिल्ली भी आरोपित बने। गिरफ्तारी से बचने के लिए अख्तर फारुक एवं लुईस खुर्शीद ने अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की। जिला जज ज्‍योत्‍सना शर्मा ने इस मामले की सुनवाई करते हुए दोनों पक्षों को सुना। उन्होंने कहा जांच के दौरान लुईस खुर्शीद संस्था की कोषाध्यक्ष भी हैं। दोनों से हुई पूछताछ का हवाला देते हुए याचिका को खारिज कर गिरफ्तारी पर रोक से इनकार कर दिया। इस मामले में सरकार की तरफ से पैरवी डीजीसी क्राइम रमेश चंद्र गोला ने की।

पी. चिदंबरम मामले में सुप्रीम कोर्ट का दिया हवाला

जिला जज ने अपनी सुनवाई में पी. चिदंबरम मामले में सु्प्रीम कोर्ट की सुनवाई का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि आर्थिक अपराथ के मामले में अग्रिम जमानत जांच को प्रभावित कर सकती है।

 

Posted By: Prateek Gupta

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