केस एक :

शहर के देवी रोड निवासी दलवीर सिंह (60) डेढ़ माह से लगातार अस्पताल पहुंच रहे हैं। परिजनों द्वारा उनकी काउंसिलिंग करा उनका उपचार कराया जा रहा है। भूलने की बीमारी की वजह से उन्हें दिक्कत महसूस हो रही है।

केस दो :

संगीता (28) भी भूलने की बीमारी से परेशान हैं। वे चीजों को रखकर भूल जाती हैं। लगभग एक महीने पहले ही अस्पताल के मन कक्ष में पहुंचकर अपनी समस्या बताई। अब विशेषज्ञ उनकी काउंसिलिंग करा रहे हैं।

केस तीन :

बालकराम (62) मधुमेह के मरीज हैं। मधुमेह का स्तर बढऩे की वजह से दिमाग पर असर पड़ा है। जिसके कारण याददाश्त कमजोर हो रही है। समस्या बढऩे पर अब परिजनों ने चिकित्सकों से संपर्क साधा है।

आगरा, जेएनएन। अल्जाइमर, भूलने की यह बीमारी बढ़ती उम्र के साथ अपना दायरा बढ़ा रही है। विशेषज्ञ इसे डिमेंसिया का ही विस्तृत रूप मानते हैं। बस फर्क सिर्फ इतना है कि डिमेंसिया में मरीज दवाओं के असर से ठीक हो सकता है लेकिन अल्जाइमर्स में बढ़ती उम्र के साथ दवाएं भी लगभग बेअसर सी होने लगती हैं। इस बीमारी में मरीज को वस्तुओं और घटनाओं को याद रखने में तो दिक्कत होती ही है, साथ ही भावनाओं की अभिव्यक्ति में भी वह खुद को असहज महसूस करता है। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. जेजे राम का कहना है कि भूलने की इस बीमारी में मरीज में निर्णय लेने की क्षमता और बोलने में समस्या आने लगती है। ज्यादातर लोगों में 60 वर्ष या इससे ज्यादा की उम्र होने पर बीमारी अपना असर दिखाती है।

जरूरी है लक्षणों की निगरानी

सैफई आयुर्विज्ञान संस्थान में मधुमेह विशेषज्ञ एवं एमडी मेडिसन डॉ. सुशील यादव का कहना है कि बढ़ती उम्र के साथ अक्सर मस्तिष्क की कोशिकाएं (न्यूरॉन्स) सिकुडऩे लगती हैं। जिसके असर बतौर केमिकल बैैलेंस में भी गड़बड़ी हो जाती है। इसी स्थिति को चिकित्सीय भाषा में अल्जाइमर्स डिजीज कहते हैं। इसके अलावा सिर में चोट लगना, वायरल इंफेक्शन और स्ट्रोक भी इस स्थिति की वजह बनते हैं। एमआरआइ के माध्यम से बीमारी का पता लगाया जा सकता है।

ये हैं मुख्य लक्षण

- स्मरण शक्ति में कमी के कारण पीडि़त सामान्य बातों को भूलने लगता है।

- घर का पता, लोगों के नाम, नहाना, दवा खाना, वस्तुओं को रखकर भूल जाना आदि समस्याएं होती हैं।

- स्वभाव चिढ़चिढ़ा हो जाता है।

मन कक्ष में पढ़ा जा रहा मन

मानसिक तौर पर परेशान ऐसे मरीजों को जिला अस्पताल में संचालित हो रहे मन कक्ष में उपचार दिलाया जा रहा है। काउंसलर निर्मला सिंह और अरुणा यादव का कहना है कि ऐसे मरीजों की संख्या तो कम है लेकिन फिर भी रोजाना लगभग चार से पांच मरीज पहुंच रहे हैं। ज्यादातर तो उम्रदराज ही होते हैं। दो मरीज ही युवा अवस्था के दर्ज हैं। हम काउंसिलिंग के जरिए उन्हें राहत पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।

विशेषज्ञ की राय

अल्जाइमर्स बढ़ती उम्र के साथ बढऩे वाली बीमारी है। जिसका सीधा संबंध में दिमाग से है। इमरजेंसी में ऐसे मरीज आते तो हैं लेकिन यहां उनकी केस हिस्ट्री को पता करना संभव नहीं होता है। लिहाजा परिजनों से प्रारंभिक पूछताछ के बाद उन्हें सैफई आयुर्विज्ञान संस्थान में न्यूरो सर्जन के पास रेफर कर दिया जाता है।'

डॉ. आरके सागर, सीएमएस

जिला चिकित्सालय। 

Posted By: Tanu Gupta

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