आगरा,जागरण संवाददाता। एक माह की देरी से नगर निगम प्रशासन ने नालों की सफाई शुरू कर दी। रविवार को मानसिक स्वास्थ्य संस्थान रोड का नाला साफ किया गया, लेकिन यह अंतिम छोर से लेकर शुरू तक साफ नहीं किया गया, बल्कि नगर निगम प्रशासन ने टुकड़ों में नाले की सफाई कराई।

प्रदेश सरकार के आदेश हैं कि 15 अप्रैल से 15 जून तक नाला की सफाई का अभियान चलना चाहिए। नाला सफाई अंतिम छोर से शुरू तक होनी चाहिए लेकिन निगम प्रशासन नाला सफाई के नाम पर रस्म अदायगी की जाती है। टुकड़ों में नालों को साफ किया जाता है। ऐसे में इस मानसून में शहर में जलभराव होने से इन्कार नहीं किया जा सकता है। मजिस्ट्रेट करें नालों की सफाई का सत्यापन : पूर्व पार्षद ममता टपलू का कहना है कि नालों की सफाई का सत्यापन मजिस्ट्रेटों के स्तर से किया जाए। पूरा खेल खुलकर सामने आ जाएगा। पार्षद बंटी माहौर का कहना है कि पिछले साल नालों की सफाई के लिए प्रदर्शन करना पड़ा था। हर दिन पहुंचती हैं शिकायतें : नगर निगम में नाला चोक होने या फिर ओवरफ्लो होने की हर दिन शिकायतें पहुंचती हैं। शिकायतों के बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। - नगर निगम प्रशासन नाला सफाई के नाम पर जनता के साथ मजाक कर रहा है। नालों को टुकड़ों में साफ करने से कोई फायदा नहीं होगा।

शिरोमणी सिंह, पार्षद - नाला अंतिम छोर से शुरू तक साफ होना चाहिए। न ही नाले सफाई टुकड़ों में होनी चाहिए।

रवि माथुर, पार्षद - नाले जितनी अच्छी तरीके से साफ होंगे। शहर में जलभराव उतना ही कम होगा। इसलिए नालों की सफाई अच्छी तरीके से होनी चाहिए।

राहुल चौधरी, पार्षद - नालों की सफाई के नाम पर रस्म अदायगी की जा रही है। नालों की सफाई 15 अप्रैल से 15 जून तक अनिवार्य रूप से होनी चाहिए।

मनोज सोनी, पार्षद

Edited By: Jagran