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सरकार से टूटी आस तो ग्रामीणों ने उठा लिया फावड़ा, आगरा का गांव बना मिसाल

By Amit Dixit Edited By: Prateek Gupta
Published: Thu, 17 Sep 2026 12:39 PM (IST)

सरकारी व्यवस्था से निराश होकर आगरा के फतेहाबाद स्थित बुढ़ाना गांव के युवाओं ने स्वयं सफाई का बीड़ा उठाया। बुढ़ाना ...और पढ़ें

फतेहाबाद के बुढ़ाना गांव में खुद सफाई करते ग्रामीण।

फतेहाबाद के बुढ़ाना गांव में खुद सफाई करते ग्रामीण।

मुन्नालाल शर्मा, फतेहाबाद (आगरा)। नालियों में जमा सिल्ट, रास्तों पर पसरी गंदगी और सफाई के लिए सरकारी व्यवस्था का इंतजार...युवाओं को रास नहीं आया। इंतजार को छोड़कर ग्रामीण युवाओं ने खुद गांव की सफाई की जिम्मेदारी उठाई।

करीब दो दशक पहले गठित बुढ़ाना विकास समिति के सदस्यों ने पहली बार गांव में सफाई अभियान चलाया और नालियों की सिल्ट बाहर निकाली। समिति अब सफाई के साथ पौधारोपण, जल संरक्षण और शिक्षा को लेकर भी अभियान चलाने की तैयारी में है।

समिति के सदस्य ओमेंद्र यादव और रामशंकर यादव ने संयुक्त रूप से बताया कि गांव में सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए कई बार ग्राम पंचायत सचिव प्रियंका और प्रधान बीना देवी से सफाई कराने के लिए कहा गया था। ग्राम पंचायत में सफाई कर्मचारी सुनीता की तैनाती है। इसके बावजूद अपेक्षित रूप से सफाई नहीं हो सकी

ग्रामीणों को पंचायत स्तर पर सचिव और प्रधान के बीच मतभेद की जानकारी मिली। इसके बाद समिति ने किसी विवाद में पड़े बिना गांव की समस्या को प्राथमिकता दी और स्वयं सफाई अभियान शुरू कर दिया।

अभियान के दौरान गांव की नालियों से सिल्ट और मिट्टी निकालकर सफाई कराई गई। समिति के सदस्यों के अनुसार नालियों से निकली सिल्ट को सूखने के बाद हटाने की जिम्मेदारी भी समिति उठाएगी, ताकि सफाई के बाद निकली गंदगी फिर रास्तों और नालियों के आसपास न पड़े

35 हजार की आबादी, 7500 मतदाता

बुढ़ाना ग्राम पंचायत की आबादी करीब 35 हजार है और यहां लगभग साढ़े सात हजार मतदाता हैं। इतनी बड़ी आबादी वाले गांव में सफाई व्यवस्था को लेकर समिति की पहल ने ग्रामीण सहभागिता का उदाहरण पेश किया है। समिति का कहना है कि गांव की समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी व्यवस्था के साथ समाज की भागीदारी भी जरूरी है।

20 साल पहले रखी थी सामाजिक बदलाव की नींव

बुढ़ाना विकास समिति की नींव करीब 20 वर्ष पहले रखी गई थी। समिति में करीब 100 स्थायी सदस्य हैं, जबकि अस्थायी सदस्य भी सहयोग करते हैं। भूतपूर्व सैनिक, शिक्षक और विभिन्न सेवाओं में कार्यरत लोग समिति से जुड़े हैं। सदस्य अपनी क्षमता के अनुसार 20 से 50 रुपये तक चंदा एकत्रित करते हैं। इसी राशि से सामाजिक कार्यों में जुटे लोगों के लिए नाश्ता आदि की व्यवस्था की जाती है


समय के साथ समिति के कई सदस्य सरकारी सेवाओं में चले गए, लेकिन सामाजिक सरोकारों से जुड़ा काम बंद नहीं हुआ। समिति ने बुढ़ाना के साथ आसपास के क्षेत्रों में भी अपनी गतिविधियां जारी रखीं। कुंआखेड़ा में शहीद कैप्टन शुभम गुप्ता के नाम से निश्शुल्क कोचिंग सेंटर शुरू करने की पहल की गई। गांव में शराबबंदी को लेकर भी जागरूकता अभियान चलाया गया।

अब चार क्षेत्रों पर रहेगा फोकस

समिति ने आगामी दिनों के लिए सफाई, पौधारोपण, जल संरक्षण और शिक्षा को प्रमुखता से चुना है। पौधारोपण के जरिए हरियाली बढ़ाने, जल संरक्षण के माध्यम से पानी बचाने और शिक्षा के क्षेत्र में जरूरतमंद बच्चों को सहयोग देने की योजना है। समिति का उद्देश्य चंदे और सामूहिक श्रम के माध्यम से गांव के विकास में ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ाना है।