आगरा, जागरण संवाददाता। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 10वीं के विद्यार्थियों का आंतरिक व बाहरी मूल्यांकन के आधार पर परीक्षाफल तैयार करने की नीति निर्धारित की है। इसको लेकर नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल्स अलाइंस आफ प्राइवेट स्कूल्स (नीसा) ने आपत्ति जताई है।

नीसा के उप्र-उत्तराखंड के रीजनल कंवीनर व एसोसिएशन आफ प्रोग्रेसिव स्कूल्स आफ आगरा (अप्सा) अध्यक्ष डा. सुशील गुप्ता ने बताया कि संगठन, प्राइवेट स्कूल्स की सबसे बड़ी संस्था है। उसने राष्ट्रपति रामनाथ कोविद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को पत्र लिखा है कि वर्तमान समय में मूल्यांकन कराना जोखिम भरा होगा, इसलिए उचित एवं निष्पक्ष परीक्षाफल को तैयार करने के लिए प्रासंगिकता व मानवीयता से विचार करें। विद्यार्थियों को ऐच्छिक विषय चयन के साथ 11वीं में प्रोन्नत किया जाए।

यह बताई दिक्कतें

संगठन का तर्क है कि 10वीं की बोर्ड परीक्षा मूल्यांकन व अंकगणना नीति, जो विद्यालयों द्वारा वर्ष भर किए गए मूल्यांकन, परीक्षणों, सत्र व प्री-बोर्ड परीक्षा आधारित है, उसे महामारी के दौर में लागू करना खतरे से भरा है क्योंकि कई जगह लाकडाउन है, विद्यालय भी बंद हैं।मूल्यांकन के लिए विद्यालय खोलने व संचालन में समस्याएं आएंगी। तमाम शिक्षक कोविड-19 पाजिटिव मिले हैं, ऐसे में मूल्यांकन से वह मानसिक तनाव में आएंगे। समिति के सदस्यों, सहायक शिक्षकों व कर्मचारियों के लिए मूल्यांकन कठिन होगा।

मानदेय भी कम

मूल्यांकन के लिए बाहरी शिक्षकों को मात्र 2500 और आंतरिक शिक्षकों को 1500 रुपये का मानदेय मिलेगा, जो बेहद कम है। संगठन ने एजूकेशन एंड हेल्थ केयर फंड बनाने की मांग की, जिसमें देशभर के विद्यालयों की सात सदस्यीय समिति व शिक्षकों को मिलने वाले मानदेय की राशि जो करीब 37 करोड़ से ज्यादा होगी, उससे आक्सीजन आपूर्ति प्रभावित राज्यों की सहायता करने या प्रधानमंत्री केयर फंड में सहयोग की मांग की।

परीक्षा शुल्क लौटाने की मांग

संगठन ने बोर्ड से परीक्षा शुल्क वापसी की मांग की है। इस वर्ष देशभर में 10वीं में 17,13,314 पंजीकृत थे, जिनसे 1650 रुपये प्रति के हिसाब से 282 करोड़, 77 लाख, 93 हजार 100 रुपए जमा कराए थे। यह राशि अभिभावकों को वापस की जाए। आपदा में नौकरी गंवाने वाले शिक्षकों की आर्थिक मदद की जाए।

Edited By: Jagran