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अब यमुना में पैदा हो रहे कछुए, वन विभाग ने किया सर्वे; नदी में दिखीं दुर्लभ प्रजातियां

By Sumit Kumar Dwivedi Edited By: Prateek Gupta
Published: Fri, 18 Sep 2026 08:32 PM (IST)

वन विभाग और डब्ल्यूएसए ने यमुना नदी में सर्वे के दौरान संकटग्रस्त नैरो-हेडेड साफ्टशेल कछुए के 20 घोंसले और लगभग ...और पढ़ें

यमुना में सर्वे के दौरान मिले दुर्लभ प्रजाति के कछुओं के अंडे।

यमुना में सर्वे के दौरान मिले दुर्लभ प्रजाति के कछुओं के अंडे।

जागरण संवाददाता, आगरा। वन विभाग ने वाइल्डलाइफ सर्वाइवल अलायंस (डब्ल्यूएसए) की टीम के साथ यमुना नदी में सर्वे के दौरान संकटग्रस्त नैरो-हेडेड साफ्टशेल कछुए (चित्रा इंडिका) के 20 घोंसले मिले। इन घोंसलों में करीब 1500 अंडे भी मौजूद हैं। यह कछुआ गंगा के मैदानी इलाकों में सबसे ज्यादा खतरे में पड़ी मीठे पानी की प्रजातियों में से एक है।

इसकी प्रजनन जगहों और आबादी के बारे में अब तक ज्यादा जानकारी नहीं थी। इसी कमी को दूर करने के लिए कीठम स्थित सूर सरोवर पक्षी विहार से सर्वे शुरू किया गया, जिसे अब कछवारा घाट तक बढ़ा दिया गया है। सर्वे के दौरान नदी के द्वीपों और रेतीले टापुओं पर ये 20 घोंसले मिले।

साथ ही मीठे पानी के कछुओं की पांच प्रजातियां और करीब 35 तरह के पक्षी भी देखे गए। यह दिखाता है कि यमुना के कुछ हिस्से अभी भी वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आवास हैं। चंबल नदी कछुओं के लिए भी जानी जाती है, लेकिन अब यमुना भी पीछे नहीं है।

डीएफओ राजेश कुमार ने कहा 20 घोंसलों का मिलना एक बड़ा संदेश है कि वन्य जीव को संरक्षित किया जा रहा है। उनके अनुकूल सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इन स्थानों की सुरक्षा और निगरानी जारी रहेगी जिससे अंडे और बच्चे सुरक्षित रह सकें। आगे सर्वे जारी रहेंगे, जिसमें और प्रजनन स्थल खोजे जाएंगे।

वहीं, पर्यावरणविद डा. केपी सिंह ने बताया अगर इन आवासों को बचाया गया तो यमुना फिर से अपनी पुरानी जैव विविधता हासिल कर सकती है।