यू-डायस पोर्टल पर गलत जानकारी देने पर शिक्षा विभाग सख्त, तीन दिन में डाटा भरने का दिया अल्टीमेटम
आगरा में, निजी स्कूलों द्वारा यू-डायस पोर्टल पर गलत जानकारी देने पर जिला शिक्षा विभाग सख्त हो गया है। आय-व्यय और शिक्षक विवरण जैसी जानकारी शून्य दिखाने वाले स्कूलों को तीन दिन के भीतर सही जानकारी देने का आदेश दिया गया है। ऐसा न करने पर यू-डायस कोड निष्क्रिय कर दिया जाएगा। यह कदम शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए उठाया गया है।

जागरण संवाददाता, आगरा। जिले में शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता को तार-तार कर रहे निजी स्कूलों पर अब शिकंजा कसेगा। ये स्कूल यू-डायस पोर्टल पर अपनी आय-व्यय, वेतन संरचना, सुविधाओं, स्टाफ व भवन से जुड़ा अनिवार्य विवरण शून्य दिखाकर पारदर्शिता से बच रहे हैं।
विभागीय मिलीभगत से अधूरा और भ्रामक डाटा भी दो-दो स्तर पर सत्यापित भी कर दिया गया। जागरण ने इस मनमानी को उजागर किया, तो जिला बेसिक शिक्षाधिकारी (बीएसए) कार्यालय ने इस गंभीर अनियमितता पर सख्ती दिखाते हुए सभी स्कूलों को तीन दिन की अंतिम चेतावनी देते हुए कड़ा आदेश जारी किया है।
जिला बेसिक शिक्षाधिकारी जितेंद्र कुमार गोंड ने सभी बोर्ड, सीबीएसई, सीआइएससीई, यूपी बोर्ड, मदरसा, समाज कल्याण व माध्यमिक शिक्षा विभाग से संबद्ध सभी स्कूलों को निर्देश दिए है कि तीन दिन में वह अपनी जनरल प्रोफाइल (जीपी), एनरोलमेंट प्रोफाइल (ईपी), फैसिलिटी प्रोफाइल (एफपी) सहित सभी माड्यूल को त्रुटिरहित पूरा कर लें।
स्कूल की आय-व्यय, वेतन विवरण, सुविधाएं, भवन संरचना, शिक्षक विवरण भी अनिवार्य रूप से अपलोड करें। 100 प्रतिशत विद्यार्थियों की अपार आइडी जनरेट किए बिना कोई भी प्रविष्टि विभागीय स्तर पर अब स्वीकार नहीं की जाएगी।
साथ ही तीन दिन में पूरा डाटा नहीं भरा गया या गलत पाया गया तो स्कूल का यू-डायस कोड निष्क्रिय कर दिया जाएगा और विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रधानाचार्य व प्रबंधक की होगी। बीएसए ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार द्वारा पोर्टल की समय सीमा दो बार बढ़ाई जा चुकी है, अब आगे कोई अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा।
अधिकांश स्कूलों की आय-व्यय शून्य, जमीनी हकीकत उलटी
जिले में तमाम निजी स्कूल ऐसे हैं, जिनमें एक से तीन-चार हजार तक विद्यार्थी पढ़ते हैं। स्कूल अभिभावकों प्रति माह हजारों रुपये फीस देते हैं, लेकिन यू-डायस पोर्टल पर उन्होंने अपनी आय ही नहीं, व्यय भी शून्य, शिक्षकों का शिक्षकों का वेतन भी शून्य दर्शाया है। कागजों में ये स्कूल बिना आय-व्यय के चल रहे हैं, जबकि हकीकत सभी जानते हैं।
ऐसा करने के पीछे भी एक विशेष उद्देश्य है। दरअसल स्कूलों ने छात्रों की प्रविष्टियां इसलिए डालीं क्योंकि बिना ऐसा किए न प्रोन्नति मिलती है, न टीसी जारी होता है। लेकिन आय-व्यय और वेतन संरचना जैसे संवेदनशील विवरण उन्होंने खाली छोड़ दिए, जिससे विभागीय हस्तक्षेप न हो।
विभागीय मिलीभगत भी सामने आई
यू-डायस पोर्टल पर प्रविष्टियों को पहले खंड शिक्षा अधिकारी और फिर जिला कार्यालय ने सत्यापित किया लेकिन अधिकारियों ने अधूरे, भ्रामक और खाली विवरण भी सत्यापित कर दिए, जो सीधे आदेशों की अवहेलना है।
जबकि यू-डायस बेहद महत्वपूर्ण है। यह देश का शिक्षा डाटा बैंक है, जिसके आधार पर भावी योजनाएं, बजट, अनुदान, मान्यता, निरीक्षण व नीतियां निर्धारित होती हैं। गलत डाटा अपलोड होने का मतलब है गलत योजनाएं और शिक्षा व्यवस्था का खोखला आधार है।

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