विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

आलू का बुरा हाल, नहीं मिल रहा बाजार में भाव; आगरा से निर्यात के सपने भी अधूरे

By Vidhyaram Narwar Edited By: Prateek Gupta
Published: Wed, 30 Sep 2026 01:18 PM (IST)

आगरा के आलू किसान गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं, जहाँ उन्हें अपनी फसल का उचित दाम नहीं मिल ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर का प्रयोग किया गया है।

सांकेतिक तस्वीर का प्रयोग किया गया है।

जागरण संवाददाता, आगरा। किसानों को लागत का दोगुना मिल सके। इसके लिए शासन प्रशासन ने किसी स्तर पर प्रयास करने की कोई कमी नहीं छोड़ी।आलू किसानों को नुकसान से उभारे जाने के लिए 15 दिन पहले आलू क्रेता-विक्रेता सम्मेलन भी हुआ।जिसमें उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि भाग लिया था।

सम्मेलन में आलू किसानों को घाटे से उभारे जाने के लिए जिन प्रयासों का जिक्र किया गया, उनमें से एक भी आज तक पूरा नहीं हो सका है। आलू फिकने की स्थिति में है।निर्यात के नाम पर आलू का एक बैग भी बाहर नहीं भेजा जा सका है। किसान चौतरफा घिर गया है। वह दोराहे पर खड़ा है।

न तो उसके पास कोल्ड स्टोरेज में रखे आलू का भाड़ा चुकाने का इंतजाम है और न ही आलू बीज लाने के लिए उसके पास पैसे हैं। कोल्ड स्टोरेजों में अभी भी 55 से 60 प्रतिशत आलू भंडारित है।

आलू फिंकने की स्थिति में है। जिन किसानों का आलू कोल्ड स्टोरेजों में जमा है, उनमें से अधिकांश किसान उसे बेचने के लिए वहां नहीं पहुंच रहे हैं। 3797, चिप्सोना आदि वैरायटी के अलावा हाईब्रिड आलू को तो कोई पूछ ही नहीं रहा है।

आलू पर आई मंदी को देखते हुए किसानों को राहत पहुंचाए जाने के लिए सरकार ने भंडारण शुल्क पर सब्सिडी देने के साथ ही भामाशाह योजना के अंतर्गत 700 रुपये प्रति क्विंटल से कम में बिकने पर अधिकतम 35 हजार रुपये की मदद सरकार की ओर से दी जाती है।

इसके साथ ही सरकार ने आलू को निर्यात कर किसानों को अच्छा भाव दिलाए जाने का भी सपना दिखाया। लेकिन इसकी हकीकत ये है कि न तो अभी तक आलू के एक बैग का निर्यात हो सका है। भंडारण शुल्क में सब्सिडी का लाभ चंद किसानों को ही नसीब हो सका है। किसानों को राहत पहुंचाने के लिए कागजी तैयारी तो की गई, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।

किसानों की पीड़ा

बिचपुरी के किसान चौधरी बीरी सिंह, बरारा के हर्षवर्धन सिंह, खंदौली के संजीव कुमार और रुनकता के विशंभर सिंह ने बताया कि फसल तैयार करने में खाद, बीज, सिंचाई, दवा और मजदूरी पर बड़ी रकम खर्च की है। लागत तक नहीं निकल पा रही है। मुनाफा तो दूर की बात है। ऐसे में भंडारित आलू किसान के लिए लाभ के बजाय आर्थिक दबाव बन गया है।

रूस भेजे थे 10 सेंपल

जिला उद्यान अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि यूपी भर से कुल 10 सेंपल रूस भेजे गए हैं, जिनमें आगरा के भी सेंपल शामिल हैं। अभी तक कोई आर्डर नहीं मिला है।निर्यात कर मुनाफा दिलाए जाने का किसानों को दिखाया सपना, सपना ही रह गया है। लागत तक निकालना मुश्किल हो गया है।

ये है स्थिति

  • कोल्ड स्टोरेज की संख्या - 332
  • आलू का रकबा - 85 हजार हेक्टेअर
  • भंडारित आलू - 55 से 60 प्रतिशत