आगरा: गिरफ्तार हमनाम महेश के बेगुनाह होने का परिजन सुबूत देते रहे पर आंखों पर पट्टी बांधे पुलिस ने एक नहीं सुनी। परिजनों ने10 हजार रुपये न देने पर पुलिस ने हमनाम को जेल भेज दिया।

निबोहरा के गांव मढ़ैया हरलाल निवासी महेशचंद को पुलिस 28 अगस्त को घर से उठा ले गई। परिजनों को बताया कि वह हत्या में वांछित हैं। पुत्र बंटू के मुताबिक पिता पर ऐसा मुकदमा नहीं था। दोनों के पिता का नाम एवं गांव भिन्न थे। पुलिस को पिता का आधार कार्ड, वोटर आइडी समेत अन्य सुबूत दिए। ग्रामीणों ने भी गवाही दी। पुलिस ने बेगुनाह महेश चंद को छोड़ने के लिए 10 हजार रुपये मांगे। जो न दे पाने पर जेल भेज दिया।

100 गांवों की छानी खाक

जमानतदारों महेंद्र सिंह, दाताराम, विजय सिंह, सोपाली राम ने छह महीने में 100 गांवों की खाक छानी। महेश के पैतृक गांव में जाने पर पता चला कि वह बाबा हो गया है। मंदिर पर रहता है। इसके बाद चारों ने आगरा, फीरोजाबाद आदि जिलों के मंदिरों में खोजा।

हाथ पर गुदवा लिया बाबा

पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए महेश ने हाथ पर लिखा नाम मिटा कर बाबा गुदवा लिया था। वो टूंडला के एक मंदिर में रहने लगा।

बच्चों ने छोड़ा खाना

किसान महेश के दो बेटे और तीन बेटी हैं। उन्होंने पिता के छूटने के बाद अन्न ग्रहण करने की कसम खाई थी। पुलिस की लापरवाही किस कदर लोगों पर भारी पड़ती है इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

Posted By: Jagran