आगरा, जागरण संवाददाता। पुलिस भर्ती परीक्षा के 'मुन्ना भाई' सॉल्वर गैंग के सरगना समेत तीन लोगों को क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया है। यह लोग परीक्षा देने के बदले हुए सौदे की रकम वसूलने छत्ता बाजार आए थे। हर अभ्यर्थी से छह से सात लाख रुपये का सौदा हुआ था। तीनों को जेल भेज दिया गया है। 

एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद ने शुक्रवार को प्रेसवार्ता में बताया कि सॉल्वर गैंग का सरगना अनीश खान है। वह एटा के थाना जैथरा के नगला सबित का रहने वाला है। पकड़े गए दो अन्य आरोपित धर्मेंद्र सिंह निवासी नगला कटील थाना पटियाली कासगंज और दुर्योधन निवासी अकबरपुर थाना अलीगंज, एटा हैं। आरोपितों ने बताया कि फीरोजाबाद के थाना मक्खनपुर निवासी अमन यादव, विजय यादव और अरविंद यादव भी उनकी गैंग में हैं।

गिरोह केंद्र और राज्य की पुलिस भर्ती परीक्षा में अभ्यर्थियों को सात लाख रुपये तक में पास कराने का ठेका लेता था। आरोपित धर्मेंद्र ने बताया कि उसने पुलिस भर्ती में आवेदन किया था। उसकी जगह सॉल्वर दुर्योधन ने लिखित परीक्षा दी थी। उत्तीर्ण होने के बाद वह प्रमाण पत्रों के सत्यापन और नाप-जोख कराने आया था। आरोपितों से एक स्कार्पियो भी बरामद की है। गिरोह को पकडऩे वाली टीम में इंस्पेक्टर छत्ता उमेश त्रिपाठी, सर्विलांस प्रभारी इंस्पेक्टर नरेंद्र सिंह, क्राइम ब्रांच के हरवेंद्र मिश्रा शामिल हैं।

अब तक 16 हो चुके हैं गिरफ्तार

एक सप्ताह में पुलिस 16 फर्जी अभ्यर्थियों को गिरफ्तार कर चुकी है। अधिकांश आरोपित बॉयोमेट्रिक और फोटो मिलान नहीं होने पर पकड़े गए।

फोटो एप की मदद से चेहरों की करते थे मिक्सिंग

आरोपितों ने बताया कि वह फोटो एप की मदद से परीक्षक को चकमा देते थे। परीक्षार्थी और सॉल्वर की फोटो एप की मदद से मिक्सिंग कर देते। परीक्षक प्रवेश पत्र चेक करने पर सॉल्वर को आसानी से नहीं पहचान पाता।

पुलिस, रेलवे और सी-टेट में बैठा चुका सॉल्वर

सॉल्वर अनीश खान ने पुलिस को बताया कि उसने पुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा में चार सॉल्वर बैठाए थे। सभी पास हो गए। इसके अलावा रेलवे की ग्रुप डी परीक्षा में भी चार सॉल्वर बैठाए थे। सी-टेट में भी एक सॉल्वर को बैठाया।

कोचिंग से तलाशते थे शिकार और सॉल्वर

सरगना अनीश ने पुलिस को बताया कि वह शिकार और सॉल्वर दोनों कोचिंग सेंटर से तलाश करता था। अभ्यर्थियों के घरों पर जाकर संपर्क करते। छह से सात लाख रुपये में सौदा हो जाता। इसके बाद मेधावी छात्रों से संपर्क कर सॉल्वर बनने के लिए एक से दो लाख रुपये का लालच देते। एक बार परीक्षा देने के बाद सॉल्वर खुद उसे ऐसे अभ्यर्थियों के बारे में जानकारी देकर मिलाते थे।  

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