अमित दीक्षित आगरा : लूट सको तो लूट। कुछ इसी पैटर्न पर तहसील सदर की पार्किंग में ठेकेदार को लूट की छूट मिली हुई है। प्रशासनिक अफसरों की नाक के नीचे दोगुना पार्किंग शुल्क वसूला जा रहा है। अफसरों ने आंख मूंद रखी है। शिकायतों को कूड़े के ढेर में फेंक दिया जाता है।

इस वित्तीय साल में तहसील सदर की पार्किंग का ठेका 15 लाख रुपये में उठा है। साइकिल के पांच, बाइक के दस और कार व अन्य चार पहिया वाहन के बीस रुपये निर्धारित हैं, लेकिन ठेकेदार द्वारा इसके उलट साइकिल चालकों से दस, बाइक से बीस और चार पहिया वाहन चालकों से 40 रुपये लिए जा रहे हैं। 20 रुपये की रसीद पीले रंग और 40 रुपये की सफेद रंग की है। अधिक पार्किंग शुल्क लेने की शिकायतें भी हुई हैं, लेकिन अफसरों ने कोई कार्रवाई नहीं की है।

हर दिन साढ़े दस हजार रुपये की वसूली

तहसील सदर में हर दिन 60 साइकिल यानी 600 रुपये (दस रुपये प्रति वाहन), 300 बाइक यानी छह हजार रुपये(बीस रुपये प्रति वाहन), 100 कार व अन्य यानी चार हजार रुपये (40 रुपये) वसूले जाते हैं। इस तरह से साढ़े दस हजार रुपये की हर दिन वसूली होती है।

तीन दिन में 50 रुपये हुआ रेट

शनिवार को तहसील सदर में चार पहिया वाहन की पार्किंग का रेट 40 रुपये था। इसकी पर्ची सफेद रंग की थी। मंगलवार को रेट 50 रुपये हो गया। इसकी पर्ची पिंक रंग की है।

कब-कितने का उठा ठेका

वित्तीय साल 2017-18, 13 लाख रुपये

वित्तीय साल 2016-17, 12 लाख रुपये

वित्तीय साल 2015-16, 10 लाख रुपये

नहीं लगा है बोर्ड

पार्किंग स्थल पर नियमानुसार रेट का बोर्ड लगा होना चाहिए। जो नहीं लगा है। हर दिन होते हैं विवाद

अधिक पार्किंग शुल्क वसूलने पर हर दिन विवाद होते हैं। कई बार तो पुलिस तक पहुंच जाती है।

पार्किंग स्थल पर नहीं खड़े होते वाहन

नियमानुसार जिन वाहन चालकों की पर्ची कटती है। उनके वाहन पार्किंग स्थल में ही खड़े होने चाहिए, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। तहसील सदर परिसर में मनमर्जी के हिसाब से वाहन खड़े होते हैं।

- निर्धारित पार्किंग रेट से अधिक वसूलने पर कार्रवाई की जाएगी। मामले की जांच कराई जाएगी।

गौरव दयाल, डीएम - पार्किंग का ठेका उठाने के दौरान अधिक वसूली न करने की शर्त होती है। ठेकेदार द्वारा ज्यादा वसूली करने पर कार्रवाई की जाएगी।

रजनीश मिश्रा, एसडीएम सदर - तहसील सदर में पार्किंग के नाम पर लूट हो रही है। कई बार इसकी शिकायत एसडीएम सदर से की जा चुकी है, लेकिन आजतक ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

लाल बहादुर राजपूत, सचिव तहसील बार एसोसिएशन

Posted By: Jagran

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