आगरा, जागरण टीम। हथिनी कुंड बैराज से छोड़ा गया लगभग साढे सात लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी फतेहाबाद तहसील मे यमुना नदी में पहुंच गया है। नदी किनारे खेतों में खडी फसलें जलमग्न हो गई हैं। एसडीएम ने गांव का जायजा लिया और ग्रामीणों को नदी की ओर न जाने की सलाह दी। उधर किसान अपने खेतों से पशुओं के लिए चारा भी नहीं ला सके। बिना बारिश के नदी में इतना उफान आने की उम्मीद किसी को भी नहीं थी।

देखते देखते फसल बर्बाद

हथिनी कुंड बैराज से यमुना में छोड़ा गया लाखों क्यूसेक पानी आगरा तक पहुंच गया है। शनिवार को यमुना नदी किनारे नरि, कांकर, तनौरा, ईधौन आदि गांवों के खादरों में खडी फसलों में बाढ़ का पानी घुस गया। जिससे बाजरा, ज्वार, हरी सब्जियो आदि फसलें जलमग्न हो गईं। डर के मारे किसान खेतों पर चारा भी नहीं ला सके।

उधर उपजिलाधिकारी जेपी पांडेय ने टीम के साथ गढी भज्जी, नरि, कांकर, भोलपुरा आदि स्थानों का दौरा किया और वहां के हालातों का जायजा लिया। अधिकारियों ने ग्रामीणों से जानकारी लेने के बाद लोगों को सलाह दी कि जब तक यमुना नदी में ज्यादा पानी है, तब तक लोग नदी के आसपास भी न जाएं।। क्योंकि नदी में इस समय ज्यादा पानी आ रहा है।

पशु पालकों को भी सलाह दी गई है कि वे पशुओं को लेकर भी नदी की ओर न जाएं। यमुना में बढ़ा जलस्तर देखने के लिए काफी लोग नदी के पास पहुंच रहे हैं। वहीं सिंचाई विभाग के अधिकारियों से बातचीत के बाद उपजिलाधिकारी ने बताया कि हथिनीकुंड बैराज से लगभग डेढ़ लाख क्यूसेक पानी और छोडा गया है। इसलिए अब खतरे की कोई बात नहीं है।

कर्मचारियों को दिए निर्देश

बाढ़ चौकियों पर तैनात किए गए कर्मचारियों से उप जिलाधिकारी ने बातचीत कर यमुना नदी में बढ़ रहे जलस्तर की जानकारी ली। यह निर्देश दिए कि ड्यूटी पर हर वक्त आलर्ट रहा जाए। किसी भी ग्रामीणों को नदी किनारे न जाने दिया जाए। यदि कहीं कोई खतरा उत्पन्न होता है तो तत्काल बचाव कार्य शुरू कर आलाधिकारियों को सूचित किया जाए।

भागदौड़ करते रहे किसान

जैसे जैसे यमुना नदी के जलस्तर बढ़ता गया। वैसे−वैसे किसानों ने अपने खेतों की तरफ दौड़ लगा दी। जिस किसान के खेतों पर निजी नलकूप एवं पंपसेट लगे हुए थे, उन्हें खोलकर अपने घरों को ले गए तो कोई अन्य सामान को घर लेकर पहुंचे।  

Edited By: Prateek Gupta

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