छोटे बच्चों में मेनिनजाइटिस का खतरा, इलाज में न करें जरा भी देरी; जान जाने तक खतरा
बच्चों में वायरल और टीबी के कारण होने वाले दिमागी बुखार (मेनिनजाइटिस) के मामले बढ़ रहे हैं, जिसके इलाज में ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
जागरण संवाददाता, आगरा। बच्चों में वायरल मेनिनजाइटिस (दिमागी बुखार) के मामले बढ़ रहे हैं। इसके साथ ही टीबी के कारण भी मेनिनजाइटिस से पीड़ित बच्चे सरकारी और निजी अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती हो रहे हैं। इन मरीजों के इलाज में देरी पर मृत्यु हो सकती है। सोमवार को मेनिनजाइटिस दिवस पर डाक्टर बच्चों को संक्रमण से बचाव और समय से इलाज उपलब्ध कराने के लिए जागरूक करेंगे।
एसएन मेडिकल कालेज एवं अस्पताल की इमरजेंसी में दौरे के साथ बेहोशी की समस्या से पहुंचने वाले पांच प्रतिशत बच्चों में मेनिनजाइटिस की समस्या मिल रही है। एसएन के बाल रोग विशेषज्ञ डा. नीरज यादव ने बताया कि मेनिनजाइटिस को आम बोलचाल में दिमागी बुखार भी कहते हैं।
पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के कारण, वायरल, बैक्टीरियल संक्रमण के साथ ही मस्तिष्क की टीम और दुर्घटना में सिर में चोट लगने से मस्तिष्क की झिल्लियाें में सूजन आ जाती है। इससे मस्तिष्क में आक्सीजन कम पहुंचने से दौरे आने लगते हैं, तेज बुखार के साथ ही सिर दर्द और उल्टी की समस्या होती है। इसके साथ ही बेहोशी छा सकती है।
इस तरह के केस में समय से इलाज ना मिलने पर मरीज की मृत्यु हो सकती है। वहीं, मरीज की जान बचने पर एक हिस्से में लकवा मार सकता है। टीबी के संक्रमण में लकवा होने की आशंका बढ़ जाती है। इससे बचाव के लिए संक्रमण से बचें, साफ सफाई रखें। बच्चों को वायरल संक्रमण से बचाने के लिए पौष्टिक आहार दें, जिससे उनकी प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहे।
इसके साथ ही बीसीजी, मेनिंगोकोकल, हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा, न्यूमोकोकल वैक्सीन लगवा सकते हैं। साथ ही बुखार के साथ दौरे आने और बेहोशी छाने पर तुरंत डाक्टर को दिखाएं इसमें देरी ना करें।
