कासगंज, जेएनएन। वक्त सुबह 11 बजे। कासगंज ढोलना मार्ग। ढोलना की तरफ से अमांपुर निवासी सुनील पैदल ही चले आ रहे हैं। साथ में पत्नी एवं बच्चे हैं तो इनके साथ ही हैं संजय। अलीगढ़ में ताला बनाने का काम करते थे, लेकिन अब रोजगार बंद है। खाने की समस्या थी तो घर चल पड़े। वाहन नहीं मिला तो किसी तरह से पैदल चले, फिर लिफ्ट ली। कई किमी पैदल चलना पड़ा। 

वहीं सिढ़पुरा निवासी अमित एवं आकाश का तो चलते-चलते हाल बेहाल हो गया था। कुछ दूर चलते तो फिर से बैठ जाते। नोएडा में नौकरी करते थे, लेकिन काम बंद हुआ। मंगलवार की रात में पैदल ही निकल पड़े। सिढ़पुरा पहुंचते-पहुंचते रात हो गई। वहीं नहर के निकट बैठे हुए सुनील, रामलाल, कमलेंद्र एवं राज सिंह ने बताया कि दिल्ली से दादरी तक पैदल ही आए। इसके बाद एक टैंकर ने अलीगढ़ तक छोड़ दिया। वहां से पैदल ही अपने घर जा रहे थे। कई तो घर से निकले थे, तब से खाना नहीं मिला। बच्चों को चिप्स खिलाकर चुप करा रहे थे। यही हाल आगरा में भी देखने को मिला। यहां दिल्‍ली से धौलपुर पैदल ही जा रहा है एक परिवार रात को हरीपर्वत चौराहा पर भूख से तड़प रहा था। हरीपर्वत थाना पुलिस ने परिवार को भोजन करवाकर उनके गंतव्‍य तक पहुंचाया।   

हर मार्ग पर था परिक्रमार्थियों जैसा नजारा

कांधे पर बैग तो थके हुए कदम। कहीं पर महिलाओं ने सामान का बोझ उठाया था तो पति बच्चों को लेकर चल रहे थे। कासगंज से एटा मार्ग हो या फिर बरेली मार्ग। हर तरफ ये ही नजर आ रहे थे। रास्ते में अगर कोई खाली ट्रक मिल जाता तो उसमें बैठ जाते, लेकिन यह सुविधा बहुत कम को ही मिल सकी।

बैलगाड़ी एवं तांगे पर किया सफर

रास्ते में किसी को अगर किसी को बैलगाड़ी या तांगा मिल गया तो उस पर भी सफर किया। देहात के मार्गों पर खेत से लौट रहे किसानों ने इनकी खासी मदद की। 

Posted By: Tanu Gupta

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