आगरा, जागरण संवाददाता।  केंद्रीय हिंदी संस्थान में पढ़ने वाले चार विद्यार्थी शनिवार को अपने वतन रवाना होंगे। इनमें दो जापान के हैं और दो पोलेंड के। रविवार को दक्षिण कोरिया के दो विद्यार्थी भी अपने देश लौट जाएंगे। संस्थान के पास पत्र आ चुका है।

लॉक डाउन के बाद से ही संस्थान में पढ़ने वाले विदेशी विद्यार्थी अपने देश वापस लौटने के लिए कोशिशों में जुटे हुए थे। जापान के दो विद्यार्थियों ने तो टिकट भी करा ली थी। लेकिन संस्थान के पास दूतावास से कोई पत्र नहीं आया था। संस्थान के निदेशक प्रो. नंद किशोर पांडेय का कहना था कि बिना सूचना के हम विद्यार्थियों को जाने की अनुमति नहीं देंगे। जापान के अलावा अन्य देशों के विद्यार्थियों द्वारा भी वतन वापसी की कोशिशें की जा रही थीं।अब जापानी और पोलेंड दूतावास से संस्थान को पत्र आ गया है। शनिवार को संस्थान की गाड़ी जापान और पोलेंड के चारों विद्यार्थियों को दिल्ली एयरपोर्ट छोड़ने जाएगी। पांच अप्रैल को दक्षिण कोरिया के दो विद्यार्थियों को जाने की अनुमति मिल गई है। प्रो. पांडेय ने बताया कि जापान, पोलेंड और दक्षिण कोरिया से विशेष विमान आ रहा है। अन्य देशों के विद्यार्थियों को भी तभी अनुमति मिलेगी, जब दूतावास से पत्र आएगा। 

तीन बार बदला जा चुका है केएचएस का नाम

हिंदी भाषा का विश्‍व पटल पर चमकाने के लिए भारत सरकार द्वारा केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल को अखिल भारतीय हिंदी प्रशिक्षण म‍हाविद्यालय को संचालित करने का दायित्‍व सौंपा गया। एक जनवरी 1963 में अखिल भारतीय हिंदी प्रशिक्षण महाविद्यायल का नाम बदलकर केंद्रीय हिंदी शिक्षण महाविद्यालय कर दिया गया। बाद में 29 अक्‍टूबर 1963 को हुई गोष्‍ठी में इसका नाम फिर बदलकर केंद्रीय हिंदी संस्‍थान कर दिया गया। आगरा स्थित मुख्‍यालय के अलावा अन्‍य राज्‍यों में इसके आठ केंद्र हैं। संस्‍थान अपनी स्‍थापना से अब तक हजारों देशी- विदेशी गैर हिंदी भाषी छात्रों को हिंदी भाषा में पारंगत कर चुका है। 

Posted By: Tanu Gupta

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