आगरा (जेएनएन): दैनिक जागरण द्वारा आयोजित नौवें जागरण फिल्म फेस्टिवल ने दर्शकों के दिलों में सुनहरी यादें छोड़कर रविवार को विदा हुआ। दिलीप ताहिल संग सीधे संवाद से शुरू हुए फेस्टिवल में प्रदर्शित अंतिम फिल्म श्रीदेवी अभिनीत इंग्लिश-विंग्लिश रही। तीनों दिन दर्शकों की भीड़ उमड़ी। फेस्टिवल में दर्शकों को 11 लघु फिल्मों व 10 फिल्मों को देखने का अवसर मिला।

सर्व मल्टीप्लेक्स में जागरण फिल्म फेस्टिवल की शुरुआत शुक्रवार शाम दीप प्रज्ज्वलन संग हुई थी। पहले दिन बॉलीवुड अभिनेता दिलीप ताहिल के साथ शहरवासियों को सीधे संवाद का मौका मिला था। दूसरे दिन शनिवार को फेस्टिवल में अंतरराष्ट्रीय लघु फिल्मों के साथ समसामयिक, अर्थपूर्ण और जीवन में हार न मानने का संदेश देने वाली फिल्में देखने का मौका मिला। कभी ठहाके लगे तो कभी तालियां गूंजी। अंतिम दिन रविवार को दर्शक उमड़े। उन्हें अंग्रेजी, ¨हदी व ब्रजभाषा में बनी फिल्में देखने का मौका मिला, जिससे वह आयोजन की सराहना करते नजर आए। जागरण फिल्म फेस्टिवल के पिछले आयोजन भी लोगों को आज तक याद हैं। -इन फिल्मों का हुआ प्रदर्शन

तू है मेरा संडे, तर्पण, पंचलैट, मुक्काबाज, लम्हे, स्ट्रिक्टिली प्रोफेशनल, नो माइंड, अश्वत्थामा, पंचनम अनमिक्स्ड, इंग्लिश-विंग्लिश। -यह लघु फिल्में दिखाई गई

अंतरराष्ट्रीय: स्कारामाऊच, जोर्न, ड्यू डे, फार फ्रॉम मेन।

भारतीय: एवरीथिंग इज फाइन, लुक्का-छुप्पी, माया, बेल, बीसमार घर, काउंटरफीट कुनकू। -जागरण फिल्म फेस्टिवल में हमें ऐसी फिल्में देखने का मौका मिला, जो कि थिएटर में रिलीज नहीं हो पाती हैं। फेस्टिवल में दिखाई गई फिल्में काफी संदेशप्रद थीं।

-कमलेश चंद्र जैन -फेस्टिवल में अर्थपूर्ण फिल्में दिखाई गई। कॉमर्शियल सिनेमा के दौर में ऐसी फिल्मों को देखने के अवसर सीमित मिलते हैं। दैनिक जागरण का यह आयोजन सराहनीय है।

-आकांक्षा सिंह

Posted By: Jagran