आगरा (जेएनएन): जागरण फिल्म फेस्टिवल (जेएफएफ) का तीसरा दिन। संडे की छुट्टी और फिल्मों का सम्मोहन। थिएटर में प्रदर्शित न हो पाने वाली फिल्मों को देखने का भी मौका मिला। ¨हदी और अंग्रेजी के साथ ब्रजभाषा में बनी फिल्में देखने को शहरवासियों ने संडे जेएफएफ के नाम कर दिया।

रजनीगंधा प्रस्तुत जागरण फिल्म फेस्टिवल के तीसरे दिन की शुरुआत सर्व मल्टीप्लेक्स (एसआरके मॉल) में शनिवार सुबह 10:30 बजे भारतीय लघु फिल्मों के प्रदर्शन से हुई। ¨हदी व अंग्रेजी में बनीं लघु फिल्मों में दिए गए संदेशों को दर्शकों ने आत्मसात किया। एवरीथिंग इज फाइन, लुक्का-छुप्पी, माया, बेल, बीसमार घर, काउंटरफीट कुनकू जैसी फिल्मों ने रंग जगाया। बोल्ड सब्जेक्ट पर निर्देशक सीन ब्राउन की अंग्रेजी फिल्म 'स्ट्रिक्टली प्रोफेशनल' का प्रदर्शन हुआ। फिल्म तीन अमीर महिलाओं सुजैन, ग्लोरिया और टिट्सी की कहानी है, जो कि अपने जीवन में रंग भरने को ब्लैक जिगोलो को किराये पर लेती हैं। इसके बाद निर्देशक चिराग की फिल्म 'नो माइंड' का प्रदर्शन हुआ। यह फिल्म एक मनोरोगी युवा पर आधारित थी, जो लोगों को अपने जाल में फंसाकर मौत के घाट उतारता है। फिल्म ने दर्शकों को बांधे रखा। दिन चढ़ने के साथ दर्शकों की भीड़ भी बढ़ती चली गई। कुछ को बच्चों के साथ आने पर मायूस भी होना पड़ा।

ब्रजभाषा में बनी निर्देशक पुष्पेंद्र सिंह की फिल्म 'अश्वत्थामा' से दर्शकों ने अपनापन महसूस किया। चंबल में शूट हुई फिल्म से दर्शक जुड़े रहे। इसके बाद आरडी बर्मन के ऊपर बनी डॉक्यूमेंट्री 'पंचम अनमिक्स्ड' का प्रदर्शन हुआ। डॉ. ब्रह्मानंद सिंह के निर्देशन में बनी फिल्म में आरडी बर्मन की जिंदगी के साथ उनकी विरासत के बारे में दर्शकों को जानने का मौका मिला। फेस्टिवल में प्रदर्शित अंतिम फिल्म अभिनेत्री श्रीदेवी द्वारा अभिनीत 'इंग्लिश-विंग्लिश' रही। इसे देखने के लिए दर्शक बड़ी संख्या में मॉल पहुंचे। अंग्रेजी न जाने वाली महिला शशि के किरदार में श्रीदेवी के अभिनय को दर्शकों ने जमकर सराहा।

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