आगरा: दिलीप ताहिल के संग सीधे संवाद से शानदार शुरुआत के बाद जागरण फिल्म फेस्टिवल में दूसरे दिन शनिवार को सिनेमा का जादू बिखरा। अंतरराष्ट्रीय शॉर्ट फिल्मों को कद्रदान मिले तो समानांतर सिनेमा को दर्शकों ने जमकर सराहा। फिल्म के पात्रों में वह स्वयं को तलाशते नजर आए। 'पंचलैट' पर ठहाके गूंजे तो 'मुक्काबाज' पर जमकर तालियां बजीं। 'तर्पण' लोगों को सामयिक नजर आई तो अनिल कपूर-श्रीदेवी की फिल्म 'लम्हे' में दर्शक अपने जीवन के खुशनुमा पलों को याद करते रहे।

रजनीगंधा द्वारा प्रस्तुत नौवें जागरण फिल्म फेस्टिवल की शुरुआत शुक्रवार शाम सर्व मल्टीप्लेक्स (एसआरके) मॉल में हुई थी। शनिवार को फिल्म फेस्टिवल सुबह 10 बजे शुरू हुआ। अंतरराष्ट्रीय शॉर्ट फिल्म स्कारामाऊच, जोर्न, ड्यू डे, फार फ्रॉम मेन का प्रदर्शन हुआ। कद्रदानों ने फेस्टिवल में प्रदर्शित संदेश प्रधान फिल्मों की जमकर सराहना की। शॉर्ट फिल्मों के बाद निर्देशक नीलम सिंह की फिल्म 'तर्पण' का प्रदर्शन हुआ। फिल्म के संवेदनशील विषय ने दर्शकों के दिल को छू लिया।

दिन चढ़ने के साथ फेस्टिवल में फिल्मों के कद्रदान भी बढ़ते जा रहे थे। फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी पर निर्देशक प्रेमप्रकाश मोदी की फिल्म 'पंचलैट' में दर्शक हंसते-हंसते लोटपोट हो गए। फिल्म के नायक गोधन का 'सिनेमा' को 'सिलेमा' बोलना दर्शकों के दिल को छू गया। शाम को निर्देशक अनुराग कश्यप की 'मुक्काबाज' के संवादों पर दर्शकों ने जमकर तालियां बजाई। खिलाड़ी के खेल संगठनों व अधिकारियों से लड़ने के जज्बे को फिल्म में दिखाया गया। शनिवार को अंतिम फिल्म निर्देशक यश चोपड़ा की वर्ष 1991 में आई 'लम्हे' रही। इसे देखने के लिए दर्शक निर्धारित समय से पहले ही मॉल पहुंच गए थे। रोमांटिक ड्रामा को उन्होंने भले ही कई बार देखा था, लेकिन दिवगंत अभिनेत्री श्रीदेवी के यादगार अभिनय की सराहना और याद इस पूरी फिल्म के दौरान होती रही।

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