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JFF 2026: रूपहले पर्दे ने ओढ़ी सिनेमा की रोशनी, आगरा में जागरण फिल्म फेस्टिवल का आगाज

By Sandeep Kumar Edited By: Prateek Gupta
Published: Fri, 18 Sep 2026 09:49 PM (IST)

आगरा में जागरण फिल्म फेस्टिवल के 14वें संस्करण का आगाज हुआ, जिसमें तीन दिनों तक फिल्मों, संवादों और कलाकारों का ...और पढ़ें

जागरण फिल्म फेस्टिवल के शुभारंभ समारोह में प्रस्तुति देतीं कलाकार।

जागरण फिल्म फेस्टिवल के शुभारंभ समारोह में प्रस्तुति देतीं कलाकार।

जागरण संवाददाता, आगरा। सिनेमाघर का अंधेरा... पर्दे पर पड़ती रोशनी... और फिर एक कहानी, जो कहीं दूर मुंबई की गलियों से निकलकर सीधे आगरा के दिल तक पहुंच गई। शुक्रवार शाम एमजी रोड स्थित अंजना सेंट्रल माल का पीवीआर-आइनाक्स कुछ ऐसा ही दृश्य रच रहा था।

बाहर शहर अपनी रफ्तार में था और भीतर रूपहले पर्दे पर सपनों की दुनिया सज चुकी थी। इस रोशनी के साथ रजनिगंधा प्रेजेंट्स जागरण फिल्म फेस्टिवल (जेएफएफ) के 14वें संस्करण का आगाज हुआ। अब तीन दिन तक आगरा फिल्मों को सिर्फ देखेगा नहीं, उन्हें महसूस करेगा

कहानियों के साथ चलेगा, किरदारों के साथ हंसेगा-उदास होगा और कलाकारों से सीधे संवाद भी करेगा। और इस सिनेमाई सफर की पहली कहानी भी आगरा की अपनी थी, जिसने अपने शहर के सामने सिनेमा का पर्दा खोला । इसके साथ ही

उद्घाटन के बाद सिनेमा की दुनिया से एक और खास मुलाकात हुई, जिसमें अभिनेता ताहिर राज भसीन दर्शकों से रूबरू हुए। फेस्टिवल की ओपनिंग फिल्म आगरा के रामबाग निवासी युवा निर्देशक राम शर्मा की म्यूजियम आफ ड्रीम्स बूनी। शहर के लिए इससे खूबसूरत संयोग शायद ही कुछ और हो सकता था कि जिस मंच पर दुनिया भर की कहानियां पहुंचने वाली थीं, उसका पहला कदम आगरा की मिट्टी से निकली कहानी के साथ पड़ा

राम शर्मा की यह फिल्म उन युवाओं की कहानी है, जो आंखों में बड़े सपने लेकर मुंबई पहुंचते हैं। मुंबई की चमक उन्हें आकर्षित करती है, लेकिन उसके पीछे संघर्ष है, असफलताएं हैं, अकेलापन है और जिंदगी की कठोर सच्चाइयां हैं।

सपनों की उड़ान और हकीकत की जमीन के बीच झूलते इन युवाओं की कहानी को फिल्म संवेदनशीलता से सामने रखती है। फिल्म इससे पहले 14वें इंडो-जर्मन फिल्म फेस्टिवल, बर्लिन में स्क्रीन हो चुकी है।

शुक्रवार को जब वही कहानी आगरा के दर्शकों के सामने बड़े पर्दे पर उतरी तो तालियों और प्रतिक्रियाओं में अपने शहर के युवा फिल्मकार के लिए गर्व भी महसूस हुआ। आगरा के लिए यह सिर्फ ओपनिंग फिल्म नहीं थी, यह अपने शहर के एक सपने का अपने ही शहर में बड़े पर्दे पर लौटना था

JFF 2026

दीप से जली लौ, पर्दे पर बिखरी रोशनी

फेस्टिवल का शुभारंभ भाजपा विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, दैनिक जागरण आगरा के महाप्रबंधक अखिल भटनागर, होटल पीएल पैलेस की चेयरपर्सन सुमन शर्मा और रजनीगंधा की ओर से मौजूद ध्रुव उपाध्याय ने दीप प्रज्वलित कर किया।

इस अवसर पर फुटवियर एवं चमड़ा उद्योग विकास परिषद के अध्यक्ष पूरन डावर, साहित्यकार एवं समाजसेवी हरविजय वाहिया, एडवोकेट अशोक चौबे, डा. हरिनारायण चतुर्वेदी सहित शहर के गणमान्य लोग और सिनेमा प्रेमी उपस्थित रहे। विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने कहा कि दैनिक जागरण केवल समाचार पत्र नहीं, मित्र की भूमिका निभाता रहा है।

समाचारों के साथ पूरे परिवार के मनोरंजन और फिल्म जगत की उभरती एवं योग्य प्रतिभाओं को मंच देने के लिए फिल्म फेस्टिवल का आयोजन इसी सोच का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इस बार भी फेस्टिवल शहरवासियों के लिए मनोरंजन के साथ सीखने का अवसर लेकर आया है।

एक पर्दा, कई दुनिया

पहले दिन जेएफएफ का सफर एक कहानी से दूसरी कहानी तक पहुंचा। अनन्या शर्मा की लघु फिल्म पेज 36 ने माता-पिता बनने की जटिलताओं, जिम्मेदारियों, प्यार और आपसी मतभेदों को भावनात्मक अंदाज में सामने रखा। इसके बाद अदनान अल राजीव की अली ने दर्शकों को एक रूढ़िवादी तटीय गांव में पहुंचाया, जहां महिलाओं का गाना प्रतिबंधित है

किशोर अली शहर जाने और अपनी पहचान छिपाने के लिए महिला की आवाज में गायन प्रतियोगिता में हिस्सा लेता है।
मनीष दुबे की हाट-द विलेज बुंदेलखंड की पृष्ठभूमि में ग्रामीण भारत के एक कठिन और संवेदनशील सच से सामना कराती है।

वहीं डा. बिजू दामोदरन की अंतरराष्ट्रीय ड्रामा फिल्म पापा बुका द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान प्रशांत महासागर के द्वीपों पर लड़ने वाले भूले-बिसरे भारतीय सैनिकों और वहां के स्थानीय लोगों के इतिहास को सामने लाती है। फिल्म फेस्टिवल के पहले ही दिन पर्दे ने आगरा को कई दुनियाओं की सैर करा दी, कहीं परिवार था, कहीं पहचान की तलाश, कहीं गांव का कठोर सच और कहीं युद्ध की भुला दी गई स्मृतियां।

हर कहानी का अपना रंग

अगले दिनों में भी फिल्मों का यह सफर जारी रहेगा। कृष्णावतारम पार्ट वन, कन्या और ओम का हरि जैसी फिल्मों के साथ देशभक्ति से जुड़ी रजनिगंधा अचीवर फिल्म : आजाद भारत भी दर्शकों के सामने होगी। फेस्टिवल की विशेषता यही है कि यहां सिनेमा किसी एक भाषा या शैली में कैद नहीं है

अभिनय, कला, रंग-तकनीक, रोमांच, एक्शन, धर्म-संस्कृति, सामाजिक सरोकार और मानवीय संवेदनाएं, हर रंग को पर्दे पर जगह मिल रही है।

फेस्टिवल में हिंदी सिनेमा की यादगार अभिनेत्री मौसमी चटर्जी को समर्पित रेट्रोस्पेक्टिव भी है। इसके तहत शक्ति सामंत निर्देशित चर्चित फिल्म अनुराग का प्रदर्शन किया जाएगा। पुराने दौर के इस सिनेमा को बड़े पर्दे पर फिर देखना उन दर्शकों के लिए स्मृतियों की वापसी होगा जिन्होंने उस दौर को जिया है, जबकि नई पीढ़ी के लिए यह हिंदी सिनेमा की एक अलग संवेदना से परिचय का अवसर होगा।

सितारे आएंगे, सवाल होंगे, संवाद होगा

जेएफएफ में फिल्मों के साथ संवाद की परंपरा भी आगे बढ़ेगी। आने वाले सत्रों में आशा नेगी, रामनदीप यादव और महिमा मकवाना जैसे कलाकार दर्शकों से रूबरू होंगे। युवाओं के लिए ये सत्र खास हैं।

क्योंकि सिनेमा के पर्दे पर सफलता की चमक दिखाई देती है, लेकिन उसके पीछे का संघर्ष, तैयारी, असफलता और सीख अक्सर दिखाई नहीं देती। कलाकारों से सीधा संवाद उस अनदेखी यात्रा की कुछ परतें खोलता है।

200 रुपये में तीन दिन की सिनेमाई दुनिया

फेस्टिवल में शामिल होने के लिए सीजन पास 200 रुपये और डे पास 100 रुपये में उपलब्ध है। क्यूआर कोड के माध्यम से पास बुक किए जा सकते हैं। 18 से 20 सितंबर तक अंजना सेंट्रल माल के पीवीआर-आइनाक्स में चलने वाला यह आयोजन आगरा को तीन दिन तक फिल्मों, कलाकारों, कहानियों और संवादों की दुनिया से जोड़ेगा।