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आगरा में भारी वाहनों से मौतें: सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और प्राधिकरणों को भेजा नोटिस

By Ali Abbas Edited By: Prateek Gupta
Published: Sat, 17 Oct 2026 03:09 PM (IST)

आगरा में भारी वाहनों से हो रही सड़क दुर्घटनाओं और मौतों का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। कोर्ट ने ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।

सांकेतिक तस्वीर।

जागरण संवाददाता, आगरा। राष्ट्रीय राजमार्ग-19 पर भारी वाहनों से हो रही सड़क दुर्घटनाओं और मौतों का मामला शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में उठा। सड़क सुरक्षा से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता और सड़क सुरक्षा कार्यकर्ता केसी जैन ने न्यायालय का ध्यान इस समस्या की ओर दिलाया।

उन्होंने बताया कि आगरा का उत्तरी बाइपास लगभग 400 करोड़ रुपये की लागत से बनकर चालू हो चुका है, लेकिन जिन भारी वाहनों का आगरा में कोई गंतव्य नहीं है, वे अब भी शहर के बीच से गुजर रहे हैं। इससे स्कूली बच्चों, मरीजों, पैदल यात्रियों, दोपहिया वाहन चालकों और अन्य लोगों की सुरक्षा पर खतरा बना हुआ है।

केसी जैन का अंतरिम आवेदन शुक्रवार की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं था। फिर भी उन्होंने सड़क सुरक्षा से जुड़े अन्य मामलों की सुनवाई के दौरान यह मुद्दा उठाया। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। अगली सुनवाई 25 नवंबर 2026 को होगी।

आवेदन के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग-19 घनी आबादी वाले इलाकों से गुजरता है। इसके दोनों ओर आवासीय कालोनियां, स्कूल, अस्पताल, बाजार और ऐतिहासिक स्मारक हैं। सिकंदरा, खंदारी, भगवान टाकीज, रामबाग और ट्रांस यमुना में भारी वाहनों के साथ स्थानीय यातायात भी चलता है। आवेदन में कई जानलेवा दुर्घटनाओं का उल्लेख है।

आठ जनवरी 2026 को विजय नगर कालोनी के पास ट्रक सड़क किनारे झोपड़ी पर पलट गया था, जिसमें तीन लोगों की मौत हुई। 15 जनवरी को सिकंदरा के पास ट्रक की टक्कर से दो लोगों की मौत हुई। सिकंदरा, खंदारी और अन्य स्थानों पर भी दुर्घटनाओं में कई लोगों की जान गई है।

14 किमी लंबा है उत्तरी बाइपास

आगरा उत्तरी बाइपास 14 किलोमीटर लंबा है और चार दिसंबर 2025 से चालू है। यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़कर यह शहर के बाहर से लगभग 38 किलोमीटर का वैकल्पिक मार्ग देता है, जबकि शहर के भीतर का मार्ग करीब 34 किलोमीटर है। यानी भारी वाहनों को बाइपास से जाने पर लगभग चार किलोमीटर अतिरिक्त चलना होगा।

आवेदन में कहा गया है कि बाइपास और यमुना एक्सप्रेसवे पर अलग-अलग टोल के कारण वाहन अतिरिक्त शुल्क से बचने के लिए शहर के भीतर से जाते हैं। जैन ने टोल व्यवस्था तर्कसंगत बनाने, प्राधिकरणों में समन्वय, सरकारी अधिसूचना, स्पष्ट संकेतक और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने अन्य शहरों में भी बाइपास से भारी वाहनों को निकालने की व्यवस्था लागू करने की अपील की। इससे दुर्घटनाओं, जाम, वायु और ध्वनि प्रदूषण में कमी आ सकती है।