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आगरा: दावे और सच्चाई के भंवर में फंसे बच्चे, बिना यूनिफार्म सरकारी स्कूल में आने की मजबूरी

By Sandeep Kumar Edited By: Prateek Gupta
Published: Thu, 15 Oct 2026 12:08 PM (IST)

आगरा के परिषदीय विद्यालयों में छात्रों को यूनिफॉर्म के लिए मिलने वाली डीबीटी राशि में देरी हो रही है। आधार ...और पढ़ें

खेरागढ़ के सरकारी स्कूल में बिना यूनिफार्म के पढ़ने पहुंचे बच्चे।

खेरागढ़ के सरकारी स्कूल में बिना यूनिफार्म के पढ़ने पहुंचे बच्चे।

जागरण संवाददाता, आगरा। परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले प्रत्येक बच्चे को यूनिफार्म, जूते-मोजे, स्वेटर, स्कूल बैग और स्टेशनरी उपलब्ध कराने का दावा बेसिक शिक्षा विभाग करता है। इसके लिए शासन स्तर से प्रति विद्यार्थी 1200 रुपये सीधे अभिभावकों के बैंक खाते में डायरेक्ट बैनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) भेजने की व्यवस्था भी है।

लेकिन योजना की इस तस्वीर का दूसरा पहलू उन बच्चों की स्थिति है, जो निर्धारित यूनिफार्म के बिना या फटी व पुरानी ड्रेस पहनकर कक्षाओं में पहुंच रहे हैं। वर्तमान में 60 प्रतिशत विद्यार्थियों को ही डीबीटी का लाभ मिला है। 30 प्रतिशत विद्यार्थियों की प्रक्रिया जारी है, वहीं 10 प्रतिशत विद्यार्थी ऐसे हैं, जिनके नाम नान सीडेड श्रेणी में पड़े हैं, जिस कारण उनके अभिभावक खाते में धनराशि आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

इसका कारण कहीं आधार, कहीं बैंक खाते की सीडिंग और कही सत्यापन का पेंच है, जो बच्चों के हक पर भारी पड़ रहा है। जिले के परिषदीय विद्यालयों की वर्तमान स्थिति समस्या की गंभीरता को सामने लाती है। दैनिक जागरण टीम ने जब परिषदीय विद्यालयों की स्थिति की पड़ताल की, तो देखा कि खेरागढ़ हो या जगनेर का ग्रामीण क्षेत्र के अन्य ब्लाक या फिर नगर क्षेत्र के विद्यालय, ऐसे लगभग 30 प्रतिशत विद्यार्थी हैं।

जिनके अभिभावकों को खाते में डीबीटी राशि मिलने का इंतजार है। कंपोजिट विद्यालय नगला रामबल में 176 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। इनमें से सिर्फ 144 विद्यार्थियों की डीबीटी राशि ही आयी है, जबकि 32 विद्यार्थियों को प्रतिक्षा है। नगर क्षेत्र की बात करें, तो उच्च प्राथमिक विद्यालय ईदगाह में 55 विद्यार्थियों में से 10 को राशि मिलने की प्रतीक्षा है।

हरीपर्वत स्थित प्राथमिक विद्यालय बुढ़ान सैयद में 80 विद्यार्थियों में से 57 की धनराशि प्राप्त हुई है। 23 विद्यार्थियों की प्रतीक्षा कब पूरी होगी, कोई नहीं जानता। वहीं मंडी सईद खां क्षेत्र के कंपोजिट विद्यालय श्यामदेवी में संचालित चार विद्यालयों के करीब 170 विद्यार्थियों में से 120 को ही राशि मिली है, 50 बच्चों को मिलना शेष है।

वहीं ग्रामीण क्षेत्र के जगनेर स्थित प्राथमिक विद्यालय जिंदपुरा में कक्षा पांच के इशांत, कक्षा एक के राज और कक्षा तीन की अभि को डीबीटी राशि नहीं मिली है। प्राथमिक विद्यालय झारपुरा के विद्यार्थी भी राशि मिलने से वंचित है। खेरागढ़ के उच्च प्राथमिक विद्यालय भोपुर कंपोजिट में कक्षा सात के भूरा, कक्षा आठ की लक्ष्मी और कक्षा दो के मयंक चौधरी का भुगतान भी लंबित है।

औपचारिकताएं पूरी, फिर भी नहीं पहुंची राशि

वहीं खेरागढ़ ब्लाक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय में कक्षा छह के विद्यार्थी परवीन और लवकुश की खाते से जुड़ी सारी औपचारिकताएं पूरी हैं, फिर भी राशि खाते में नहीं पहुंची। यही स्थिति लवकुश की है, जिनके अभिभावक भी धनराशि की प्रतीक्षा कर रहे हैं। राशि न मिलने के कारण परिवार उनकी यूनिफार्म नहीं खरीद पा रहा है।

लगातार बनाए जा रहे हैं बैच और आधार

जिला बेसिक शिक्षाधिकारी डा. राकेश कुमार सिंह ने बताया कि जिले 2459 विद्यालयों में कक्षा एक से आठवीं तक दो लाख विद्यार्थी पंजीकरण है। इनमें से 1.66 लाख विद्यार्थियों को डीबीटी का लाभ मिल चुका है। चार हजार विद्यार्थियों के बैच की राशि एक-दो दिन में उनके अभिभावकों के खातों में पहुंच जाएगी। चार हजार विद्यार्थियों का डाटा शिक्षकों और 22 विद्यार्थियों का डाटा खंड शिक्षाधिकारी (बीईओ) के पोर्टल पर लंबित हैं।

ऐसे में 10200 विद्यार्थियों को जल्द ही लाभ मिल जाएगा। छह हजार विद्यार्थियों का डाटा नान सीडेड है, जबकि 12 हजार विद्यार्थियों के आधार कार्ड नहीं है। ऐसे में लंबित मामलों का जल्द निस्तारण कराने के साथ, नान सीडेड मामलों को सुलझाया जा रहा है। साथ ही जिन विद्यार्थियों के आधार कार्ड नहीं है, उनके आधार कार्ड बनवाए जा रहे हैं। वर्तमान में जिले में 36 में से 16 आधार बनाने की मशीन सक्रिय है।

शेष के आपरेटर का चयन होते ही इन्हें भी सक्रिय कर आधार बनाने और उनके संशोधन का काम तेज किया जाएगा। दीपवाली से पूर्व एक मेगा पीटीएम कर अभिभावकों को बुलाकर छोटे-छोटे मामलों का निस्तारण किया जाएगा। इसमें लक्ष्य रखा जाएगा कि विद्यार्थी यूनिफार्म और स्वेटर पहनकर आएं।

यह हैं नाॅन सीजेज खाते

डीबीटी की राशि खाते में प्राप्त करने के लिए बैंक खाते की केवाइसी होने के साथ उनकी मैपिंग भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआइ) में भी होना अनिवार्य है, तभी उसमें एनपीसीआइ के माध्यम से भुगतान प्राप्त होगा। जिन अभिभावकों के बैंक खाते से आधार नंबर तो जुड़े हों, लेकिन वह डीबीटी / एनपीसीआई सर्वर से मैप नहीं हैं, तो उनमें डीबीटी की राशि प्राप्त नहीं होगी।