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सोना-चांदी की चमक में फिर से आएगा निखार, बजट में जीएसटी और इम्पोर्ट शुल्क रहा स्थिर

Published: Mon, 02 Feb 2026 03:53 PM (IST)

आगरा में सोने-चांदी के दामों में बजट से पहले और बाद में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया। व्यापारियों को आयात शुल्क ...और पढ़ें

एमजी रोड स्थित तनिष्क शोरूम पर ज्वैलरी पसंद करतीं महिलाएं। जागरण

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जागरण संवाददाता, आगरा। सोने और चांदी की बढ़ते मूल्यों के कारण बाजार अस्थिर था। रविवार को अवकाश के दिन भी एमसीएक्स खुला और पूरे दिन कारोबारियों की निगाह टिकी रही। दो दिन में एक लाख रुपये प्रति किलोग्राम चांदी के मूल्य टूटने और सोने में भी 40 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम का अंतर आने से बाजार को बजट से बड़ी उम्मीद थी।

इंपोर्ट ड्यूटी सात प्रतिशत को घटाने, जीएसटी घटाने सहित दूसरी मांगें थी, लेकिन कोई राहत नहीं मिली है। कोई वृद्धि नहीं होने को ही कारोबारी राहत मान रहे, जबकि बजट के बाद सोने, चांदी के मूल्यों में फिर से निखार आने का आंकलन हैं।

आम बजट से दो दिन पहले चांदी के मूल्यों में बड़ी गिरावट ने बाजार को बुरी तरह प्रभावित कर दिया था। सहालग के खरीदार जो एक चौथाई पहुंच गए थे, उनकी संख्या बाजार में बढ़नी शुरू हुई, लेकिन बड़े निवेशकों में हलचल बढ़ गई थी।

बाजार को लेकर नए-नए कयास लगने लगे। रविवार को बजट के बाद सोना हाजिर में तीन हजार रुपये की गिरावट आइ, जिससे मूल्य 1,62,000 और एमसीएक्स पर 22 हजार रुपये की गिरावट आई, जिससे मूल्य एमसीएक्स 1,48,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गए।

वहीं चांदी हाजिर में 16 हजार टूटी और मूल्य 2.76 लाख और एमसीएक्स पर 67 हजार टूट मूल्य एमसीएक्स 2.65 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गए।

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आभूषण ज्वेलर्स के निदेशक एवं इंडिया जेम्स एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल के जोनल कमेटी सदस्य आनंद प्रकाश ने कहा कि यह बजट समग्र रूप से आर्थिक स्थिरता और औपचारिक अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ाता हुआ दिखाई देता है।

प्रमुख मांगें अब भी लंबित हैं। इसमें कार्यशील पूंजी के दबाव को कम करने, डिजिटल गोल्ड के लिए स्पष्ट नियामक ढांचा शामिल है। उन्होंने कहा कि स्वर्ण एवं रजत आभूषणों पर जीएसटी दर में कमी, स्वर्ण आयात पर सीमा शुल्क में राहत, 22 कैरेट आभूषणों के लिए औपचारिक ईएमआइ एवं उपभोक्ता ऋण सुविधाएं तथा इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर से जुड़ी समस्याएं अभी खड़ी हैं।

उन्होंने कहा बाजार में प्रोफिट बुकिंग के कारण बाजार में बड़ा अंतर आया है, लेकिन ये अभी फिर से रफ्तार पकड़ेगा। तनिष्क फ्रेंचाइजी अनुराग बंसल का कहना है कि जीएसटी, आयात शुल्क में घटने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सोने के मूल्यों में गिरावट आने से ग्राहकों की संख्या में वृद्धि हुई है।

आगरा सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष नितेश अग्रवाल का कहना है कि आयात शुल्क घटता तो आम ग्राहकों को सीधा लाभ मिल सकता था। मूल्यों की वृद्धि ने बाजार को प्रभावित किया है।

आगरा सराफा मैन्रूुफैक्चरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष बृज मोहन रैपुरिया का कहना है कि आम आदमी के आयोजनों को चांदी के मूल्यों ने बुरी तरह प्रभावित किया था। उनकी खरीद आधी से भी कम रह गई थी। अब एक बार जीएसटी, आयात शुल्क दोनों में राहत की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है।

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