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डीएनए रिपोर्ट ने खोली सच्चाई, कानपुर के दुष्कर्मी को 20 साल की कड़ी सजा

By Ali Abbas Edited By: Prateek Gupta
Published: Mon, 07 Sep 2026 11:09 PM (IST)

कानपुर देहात के दुष्कर्म मामले में आरोपी संदीप को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। पीड़िता ...और पढ़ें

आगरा की विधि विज्ञान प्रयोगशाला।

आगरा की विधि विज्ञान प्रयोगशाला।

HighLights

  1. पीड़िता के अंतर्वस्त्र से मिले डीएनए ने साबित किया अपराध।

  2. आगरा फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट बनी सजा का आधार।

अली अब्बास, आगरा। दुष्कर्म के मामले में आरोपित संदीप ने अपने बचाव के लिए तरह तरह का पैंतरा अपनाने का प्रयास किया। आरोपित पक्ष की ओर से तमाम तर्क दिए गए, लेकिन पीड़ित किशोरी के अंतर्वस्त्र से मिले द्रव्य का आरोपित के डीएनए से मिलान सजा दिलाने में मजबूत साक्ष्य साबित हुआ।

न्यायालय ने संदीप को दोषी पाते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। दुघ्कर्म और पाक्सो एक्ट के मामलों में फोरेंसिक साक्ष्य दोषियों को सजा दिलाने में महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो रहे हैं। कानपुर देहात के चौबेपुर थाना क्षेत्र में फरवरी 2022 में दुघ्कर्म की घटना हुई। आरोपित संदीप कुमार के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने जेल भेज दिया

आरोपित काे सजा दिलाने के लिए पीड़़िता व अन्य की गवाही के अलावा मजबूत फोरेंसिक साक्ष्य की जरूरत थी। कानपुर देहात की पुलिस ने पीड़िता के अंतर्वस्त्र के साथ ही आरोपित के खून का नमूना लेकर वर्ष 2023 में डीएनए मिलान के लिए आगरा फोरेंसिक लैब भेजा। डीएनए अनुभाग के उप निदेशक श्रीकृष्ण मौर्य द्वारा डीएनए नमूनों की जांच की।

पीड़िता के अंतर्वस्त्र पर मिले द्रव्य से आरोपित के संदीप से लिए गए नमूने का डीएनए मिलान कराया गया। अंर्तवस्त्र पर मिले द्रव्य का आरोपित संदीप के डीएनए से मिलान हो गया। न्यायालय में अभियोजन पक्ष के लिए डीएनए जांच रिपोर्ट महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हुई

जांच करने वाले उप निदेशक की भी गवाही हुई। कानपुर देहात में विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट ने आरोपित संदीप को 31 जुलाई 2026 को सजा सुनाई।

चर्चित मामले

केस एक: मैनपुरी की एक महिला ने अपने ससुर पर शारीरिक शोषण का आरोप लगाया। दावा किया कि उसने जिस बच्चे को जन्म दिया है, वह उसके ससुर का है।

मामला पुलिस तक पहुंचने पर उसने सच का पता लगाने के लिए बच्चे और आरोपित ससुर का नमूना लेकर डीएनए मिलान के लिए आगरा लैब भेजा। महिला द्वारा ससुर पर लगाया आरोप निराधार निकला।

केस दो: अलीगढ़ में एक बच्चे पर दो परिवारों द्वारा दावा किया गया। दोनों परिवारों का कहना था कि बच्चा उनका है। जिस पर पुलिस ने गुत्थी सुलझाने को फोरेंसिक लैब की मदद ली। दोनों दंपतियों का नमूना लेकर डीएनए मिलान के लिए लैब भेजा। यहां विज्ञानियों द्वारा डीएनए मिलान के बाद बच्चे को उसके असली माता-पिता के सिपुर्द कर दिया गया।

क्या कहते हैं आंकड़े

421: वर्ष 2023 में डीएनए और पाक्सो से संबंधित मामले लैब में आए।
136: विज्ञानियों ने डीएनए और पाक्सो के मामले जांच के बाद निस्तारित किए।
360: वर्ष 2024 में डीएनए और पाक्सो से संबंधित मामले लैब में आए।
154: विज्ञानियों ने डीएनए और पाक्सो के मामले जांच के बाद निस्तारित किए।
235: एक जनवरी 2025 से 30 अक्टूबर 2025 के दौरान डीएनए और पाक्सो से संबंधित मामले लैब में आए।
143: विज्ञानियों ने डीएनए और पाक्सो के मामले जांच के बाद निस्तारित किए।

कानपुर देहात पुलिस द्वारा पीड़िता का अंतर्वस्त्र और आरोपित के रक्त का नमूना डीएनए मिलान के लिए फोरेंसिक लैब भेजा गया था। आरोपित का डीएनए मिलान मुकदमे में मह्रत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हुआ। न्यायालय ने आरोपित को 20 वर्ष की कठोर सजा सुनाई।

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श्रीकृष्ण मौर्य उप निदेशक फोरेंसिक लैब आगरा