आगरा: रुपये का कमजोर होना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता की बात है। इससे पेट्रोल-डीजल समेत खाद्य सामग्री के दाम भी बढ़ेंगे। यही हाल रहा तो भारत आर्थिक मंदी की चपेट में आ जाएगा और महंगाई आम आदमी की कमर तोड़ देगी। इससे निपटने के लिए भारतीय सरकार को निर्यात बढ़ाना होगा।

यह कहना है आगरा कॉलेज के अर्थशास्त्र विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुधीर चौहान का। वे सोमवार को दैनिक जागरण कार्यालय में आयोजित विमर्श कार्यक्रम में 'गिरता रुपया कितना हानिकारक' विषय पर विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वैश्रि्वक बाजार में रुपया गिरने से अर्थव्यवस्था पीछे जा रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल के दाम 80 रुपये प्रति बैरल हैं। 57 फीसद अर्जित विदेशी मुद्रा भारत तेल पर ही खर्च कर देता है। डॉलर के मुकाबले रुपये के तेजी से हो रहे अवमूल्यन की वजह अमेरिका की अर्थव्यवस्था मजबूत होना है। अमेरिका ने अपने यहां ब्याज दरें बढ़ा दी हैं, जिससे भारत में निवेश को झटका लगा है। विदेशी निवेशक यहां से अपनी पूंजी समेटकर लौट रहा है। पिछले एक साल में रुपये का मूल्य नौ फीसद तक गिरा है।

उन्होंने कहा कि रुपये का अवमूल्यन अन्य मुद्राओं येन, मार्क, फ्रेंक और पाउंड स्टरलिंग के मुकाबले ज्यादा नहीं है, जबकि यूएस डॉलर के मुकाबले रुपया टिक नहीं पा रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था तभी मजबूत होगी जब बुनियादी ढांचे का विकास होगा। हमें अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ानी होगी। विभिन्न उत्पादों का बड़े पैमाने पर निर्यात करना होगा। इसके अलावा आरबीआइ भी कुछ ठोस फैसले लेकर रुपये की गिरती स्थिति संभाल सकती है। आज रुपये के मुकाबले डॉलर का मूल्य 72.51 है। सरकार को चाहिए कि वह अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए पर्यटन को बढ़ावा दे और इसके लिए राष्ट्रहित में योजनाएं बनाए न कि स्वार्थ सिद्धि के लिए। उन्होंने ताज इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उदाहरण देकर बताया कि इसकी जरूरत आगरा को थी जो नेताओं की स्वार्थपूर्ति के लिए जेवर में बनवाया जा रहा है। जापान ने पेश की मिसाल

अगस्त 1945 में परमाणु हमले के बाद जापान की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई थी। इसके बाद भी उसने हार नहीं मानी और सभी कर्मचारियों की तनख्वाह आधी और काम दोगुना कर दिया। लोगों ने भी राष्ट्रीय भावना से काम किया और आज यह देश विश्व की तेजी से उभरती हुई दूसरी शक्ति है। विज्ञान और प्रोद्यौगिकी के मामले में जापान ने कई कीर्तिमान बनाए हैं। ऐसे तय होता है रुपये का मूल्य

पहले विदेशी और भारतीय मुद्रा का मूल्य स्वर्ण मानक में तय होता था। फिर रजत मानक में होने लगा और अब क्रय शक्ति क्षमता सिद्धांत के अनुसार मूल्य तय किया जाता है। सरकार चाहे तो न बिगड़े स्थिति

भारतीय सरकार यदि कड़े कदम उठाए तो रुपये की गिरती कीमतों की रोकथाम संभव है। उसे ठोस नीतिगत फैसले लेने होंगे। आधारभूत ढांचा मजबूत बनाना होगा। भारतीय निर्मित वस्तुओं को बड़े पैमाने पर निर्यात करना होगा। आइटी सैक्टर को मजबूत करना होगा।

Posted By: Jagran