यूपी के इस जिले में हर सरकारी जमीन का होगा ऑडिट, DM का नया प्रयोग
डीएम मनीष बंसल ने आगरा में सभी सरकारी जमीनों, जैसे नजूल और शत्रु संपत्ति, के ऑडिट का नया प्रयोग शुरू ...और पढ़ें

आगरा के डीएम मनीष बंसल।
जागरण संवाददाता, आगरा। नजूल भूमि हो या फिर शत्रु संपत्ति और चरागाह। प्रत्येक सरकारी भूमि का आडिट होगा। पूर्व में हुए सत्यापन की पहली बार क्राॅस चेकिंग कराई जाएगी कि आखिर रिक्त भूमि पर कोई कब्जा तो नहीं है। अगर कब्जा निकलता है तो कब्जेदार का नाम और दोषी अधिकारियों की सूची तैयार की जाएगी।
जबकि रिक्त भूमि को लेकर गरीबों के आवास या फिर अन्य किसी सरकारी योजना में प्रयोग किया जाएगा। डीएम मनीष बंसल का यह नया प्रयोग है। इसकी वजह भी है। कलक्ट्रेट से लेकर छह तहसीलों में हर दिन आठ से 10 शिकायतें पहुंचती हैं। इसमें सरकारी भूमि पर कब्जे के आरोप लगाए जाते हैं। आधा दर्जन श्रेणियों की भूमि के रजिस्टर प्रत्येक तहसील में रखे जाएंगे।
जिले में नजूल भूमि, राजकीय आस्थान, शत्रु संपत्ति, सीलिंग भूमि, निष्क्रांत संपत्ति, चरागाह और ग्राम पंचायतों की भूमि है। नौ साल पूर्व प्रदेश सरकार ने सरकारी भूमि से कब्जे हटाने और सर्वे पर जोर दिया था। जिले में नजूल भूमि 60 लाख वर्ग मीटर है। 50 हजार वर्ग मीटर भूमि पर कब्जा है। ढाई लाख वर्ग मीटर भूमि रिक्त है। हर माह सरकारी भूमि से कब्जा हटाने के लिए अभियान भी चलता है।
सरकारी कॉलेजों के पास हैं जमीन
इस श्रेणी की भूमि सेंट जोंस काॅलेज, आगरा काॅलेज सहित डेढ़ दर्जन सरकारी काॅलेजों के पास है। चार साल में दो दर्जन पट्टे निरस्त किए गए हैं। शासन के आदेश पर अब पट्टों का नवीनीकरण नहीं हो रहा है। वहीं इस श्रेणी में वह भूमि आती है जो अंग्रेजों के कब्जे में थी। यह भूमि राजाओं, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की थी और इसे जब्त कर लिया गया था।
वैसे इस भूमि पर राज्य सरकार का मालिकाना हक होता है लेकिन अधिकांश भूमि पट्टे पर उठा दी गई है। राजकीय आस्थान की भूमि शहर में 10 लाख वर्ग मीटर भूमि है। ढाई लाख वर्ग मीटर भूमि रिक्त और 25 हजार वर्ग मीटर भूमि पर कब्जा है। इस श्रेणी की भूमि का प्रबंधन केंद्र या फिर राज्य सरकार के राजस्व विभाग द्वारा किया जाता है। सबसे अधिक भूमि तहसील सदर में है।
एक लाख वर्ग मीटर से अधिक भूमि को लीज पर उठाया गया है। शत्रु संपत्ति श्रेणी में चार लाख वर्ग मीटर भूमि है। इस श्रेणी में वह भूमि आती है जिसमें लोग पाकिस्तान या फिर चीन चले गए। यह भूमि सीधे सरकारी नियंत्रण की होती है। इसमें कई बंगले भी शामिल हैं। 90 हजार वर्ग मीटर भूमि खाली पड़ी है। तीन लाख वर्ग मीटर निष्क्रांत संपत्ति की भूमि है। सबसे अधिक भूमि तहसील सदर और एत्मादपुर में है।
निष्क्रांत संपत्ति
इस श्रेणी में वह भूमि आती है जो देश को छोड़कर पाकिस्तान चले गए। ऐसी संपत्तियों को सरकार ने अपने नियंत्रण में ले लिया है। इसके अलावा चरागाह की आठ लाख वर्ग मीटर, सीलिंग की एक लाख वर्ग मीटर और ग्राम पंचायतों की भूमि शामिल है। डीएम पहली बार सभी संपत्तियों का आडिट कराने जा रहे हैं। इसमें दस्तावेजों का मिलान मौके पर किया जाएगा। मौके पर भूमि खाली है या फिर कब्जा है।
अगर कब्जा है तो किसका है। कितने साल से कब्जा है। कितनी शिकायतों हुई और फिर दोषी अधिकारी कौन हैं। भूमि को लेकर कोर्ट में मामला तो नहीं चल रहा है। आडिट में इन सभी तथ्यों को शामिल किया जाएगा। अगर भूमि खाली पड़ी है तो उसे सरकारी योजनाओं में प्रयोग किया जाएगा। इसकी रिपोर्ट शासन को भी भेजी जाएगी।
