आगरा कैंट को ISO सर्टिफिकेशन, फोर्ट और राजा की मंडी सहित पांच स्टेशन पर्यावरण मानकों पर खरे
आगरा रेल मंडल के कैंट, आगरा फोर्ट सहित पांच स्टेशनों को पर्यावरण संरक्षण और विकास के लिए आईएसओ प्रमाण पत्र ...और पढ़ें

आगरा कैंट रेलवे स्टेशन।
जागरण संवाददाता, आगरा। पर्यावरण संरक्षण और विकास की दिशा में आगरा रेल मंडल के खाते में एक और उपलब्धि शामिल हो गई है। कैंट, आगरा फोर्ट सहित पांच स्टेशनों को आइएसओ प्रमाण पत्र मिला है। यह पहला मौका है जब पांच स्टेशन शामिल हुए हैं। प्रमाण पत्र की वैधता आठ सितंबर 2027 तक रहेगी।
इन सभी स्टेशनों का चयन अमृत भारत योजना में डेढ़ साल पूर्व हो चुका है। प्रत्येक स्टेशन पर 10 से 15 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। सोलर सिस्टम भी लग चुके हैं।
रेल मंडल आगरा में 102 स्टेशन हैं। इसमें कैंट, आगरा फोर्ट, राजा की मंडी, ईदगाह और मथुरा प्रमुख स्टेशन हैं। इन स्टेशनों से हर दिन 65 हजार यात्री सफर करते हैं। रेलवे को टिकटों से डेढ़ लाख रुपये की आय होती है। एक्यूसी प्रा. लि. नोएडा ने हाल ही में पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली का ऑडिट किया।
निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए जाने के बाद पांचों स्टेशनों को आइएसओ प्रमाण पत्र जारी किया है। टीम लीडर रमेश चंद्र ने ऑडिट प्रक्रिया के दौरान पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली के विभिन्न पहलुओं का मूल्यांकन किया। संबंधित विभागों द्वारा किए जा रहे पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों की समीक्षा की।
उन्होंने पर्यावरणीय प्रदर्शन में निरंतर सुधार, अपशिष्ट प्रबंधन, संसाधनों के प्रभावी उपयोग और कर्मचारियों की पर्यावरणीय जागरूकता को महत्वपूर्ण बताया। अब कैंट रेलवे रेलवे स्टेशन, आगरा फोर्ट, राजा की मंडी, मथुरा और कोसीकलां स्टेशन को आइएसओ प्रमाण पत्र मिला है।
मंडल द्वारा स्टेशनों को अधिक स्वच्छ, हरित, पर्यावरण अनुकूल एवं यात्री सुविधाओं की दृष्टि से बेहतर बनाने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। पांचों स्टेशनों को एक साथ मिले इस प्रमाण-पत्र से आगरा मंडल की स्वच्छ, हरित एवं पर्यावरण अनुकूल रेलवे स्टेशन विकसित करने की प्रतिबद्धता को मजबूती मिली है।
पर्यावरण संरक्षण के अंतर्गत अपशिष्ट जल एवं ठोस अपशिष्ट के पुनर्चक्रण तथा ऊर्जा बचत की तकनीकों को अपनाया जा रहा है। इन प्रयासों से संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ रेलवे परिसरों में स्वच्छ एवं हरित वातावरण को बढ़ावा मिल रहा है।
इसलिए हुआ चयन
इन स्टेशनों में यात्री सुविधाएं बेहतर हुई हैं। पर्यावरण मानकों पर विशेष ध्यान दिया गया है। सोलर एनर्जी को बढ़ावा दिया जा रहा है।
