जागरण संवाददाता, आगरा: केरल आपदा के नाम पर बेसिक शिक्षाधिकारी की पहल पर अब विवाद शुरू हो गया है। परिषदीय विद्यालय के शिक्षकों और कर्मचारियों ने वेतन से काटे गए एक हजार रुपये को मनमानी करार दे इसे नियम विरुद्ध बताया है। ब्लॉकों में तैनात शिक्षकों और शिक्षक नेताओं का कहना है कि आदेश कब जारी हुआ और इसकी मंजूरी कब दी उन्हें जानकारी तक नहीं।

मंगलवार को परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों का वेतन आया, तो उनके चेहरे खिल गए। लेकिन एकाउंट देखा, तो उसमें एक हजार रुपये कम थे। विभाग से जानकारी की, तो पता चला कि बीएसए आनंद प्रकाश शर्मा के आदेश से केरल पीड़ितों के लिए सभी शिक्षकों के वेतन से एक-एक हजार रुपये काट लिए गए हैं। इसके बाद से शिक्षक खुद को ठगा मान रहे हैं क्योंकि उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं थी। लिहाजा उन्होंने शिक्षक संगठनों के माध्यम से अपना विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया है।

बिना आदेश काटा वेतन : राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. मनोज परिहार ने बताया कि आपदा पर शिक्षकों ने पहले भी मदद की है। नेपाल त्रासदी के बाद बेसिक शिक्षा सचिव के आदेश पर शिक्षकों ने एक दिन का वेतन दिया था और उन्हें आयकर में छूट भी मिली थी, लेकिन इस बार बिना आदेश रकम काट ली गई। कई शिक्षक केरल आपदा में सहयोग नहीं करना चाहते थे, फिर भी उनके खाते से काटा गया।

ठगा महसूस कर रहा शिक्षक : यूटा महामंत्री देवेंद्र कुशवाहा ने बताया कि वेतन आने पर केरल आपदा के लिए धनराशि काटे जाने की जानकारी हुई। विभाग को काटना था, तो कम से कम शिक्षकों और शिक्षक संघों से मंत्रणा करनी थी।

Posted By: Jagran

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