आगरा: 500 करोड़ की जमीन के लिए 22 साल पुराने पेट्रोल पंप के दस्तावेज खंगाले जाएंगे
आगरा कलक्ट्रेट की 500 करोड़ रुपये की भूमि को लेकर नई जांच शुरू हुई है, जिसमें 22 साल पुराने पेट्रोल ...और पढ़ें

कलक्ट्रेट के पास की जमीन, इसे सरकारी होने का दावा है।
HighLights
आगरा कलक्ट्रेट की 500 करोड़ रुपये की भूमि की जांच शुरू।
22 साल पुराने पेट्रोल पंप के दस्तावेज खंगाले जाएंगे।
डीएम मनीष बंसल ने डीएसओ कार्यालय से मांगी रिपोर्ट।
जागरण संवाददाता, आगरा। एमजी रोड स्थित कलक्ट्रेट की भूमि को लेकर एक और जांच शुरू हो गई है। 500 करोड़ रुपये की भूमि को लेकर 22 साल पुराने पेट्रोल पंप के दस्तावेज खंगाले जाएंगे। डीएम मनीष बंसल के आदेश पर डीएसओ कार्यालय से पंप से संबंधित पूरी जानकारी मांगी गई है। आखिर पंप बंद क्यों हुआ और भूमि किसकी थी।
पंप का संचालन कलक्ट्रेट के गेट नंबर दो के पास हुआ था। कुछ माह चलने के बाद हिंदुस्तान पेट्रोलियम का पंप बंद हो गया था। वहीं एसीएम तृतीय की कोर्ट में भूमि से संबंधित वाद की सुनवाई 21 सितंबर को होगी।
मौजा चक अब्बल के खसरा नंबर 431 में 31690 वर्ग मीटर भूमि है। यह भूमि कलक्ट्रेट कचहरी के नाम अंकित है। वर्ष 1803 में अंग्रेजों ने पहली बार इसमें तहसील कार्यालय खोला था। वर्ष 1902 में पुलिस कार्यालय खुला। इसके बाद बाकी के सरकारी कार्यालय बारी-बारी से खुले। 31690 वर्ग मीटर में 9080 वर्ग मीटर भूमि पर कब्जा है।
कलक्ट्रेट के गेट नंबर दो के पास वर्ष 2004 में हिंदुस्तान पेट्रोलियम का पंप खुला था। इसकी अनुमति तत्कालीन डीएसओ ने जारी की थी। पंप खुलने के कुछ माह के बाद यह बंद हो गया था। पंप आखिर क्यों बंद हो गया था, जिला प्रशासन ने इसकी रिपोर्ट मांगी है।
डीएम से डीएसओ कार्यालय से पूछा है कि पंप संचालन न होने की मुख्य वजह क्या थी। पंप को जब अनुमति दी गई तो उस समय भूमि से संबंधित कौन कौन से दस्तावेज लगाए गए थे। किन-किन विभागों ने पंप को लेकर अनुमति जारी की थी। पंप किसके नाम पर जारी हुआ था।
वहीं एसीएम तृतीय कोर्ट में 500 करोड़ रुपये की भूमि के वाद की सुनवाई 21 सितंबर को होगी। इसमें संबंधित पक्ष द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों की जांच होगी।
