आगरा (जेएनएन) : वाणिज्य कर विभाग के लिए जीएसटी रिफंड के करीब 125 मामले गले की फांस बन गए हैं। कारण सभी आवेदन एक हजार रुपये से कम के हैं। वहीं कुछ रिफंड तो महज एक और दो रुपये के हैं। साथ ही आवेदन करने वाले भी सामने नहीं आ रहे। ऐसे में विभाग न तो इनका निस्तारण कर पा रहा है और न ही इन्हें निरस्त कर पा रहा है।

वाणिज्य कर विभाग में जीएसटी रिफंड निस्तारण की मॉनीट¨रग खुद कमिश्नर कामिनी चौहान रतन कर रहीं हैं, इसलिए अधिकारी मामलों के निस्तारण के लिए सक्रिय हैं। लेकिन आगरा में रिफंड के करीब 125 मामले ऐसे हैं, जिनका निस्तारण विभाग के लिए परेशानी का सबब बन चुका है। इन मामलों में व्यापारियों ने ऑनलाइन रिफंड तो दाखिल किया लेकिन उसकी हार्डकॉपी जमा नहीं कराई। विभाग अब ऐसे आवेदकों को नोटिस जारी कर जल्द से जल्द हार्डकॉपी जमा कराने के निर्देश दिए हैं। ट स्टिंग के लिए किए आवेदन:

वाणिज्य कर विभाग के एडीशनल कमिश्नर ग्रेड वन डॉ. बुद्धेश मणि ने बताया कि करीब 125 मामलों को देखकर ऐसा लगता है, कि उन्हें महज चैक करने के लिए डाला गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि उनकी रकम एक, दो रूपये हैं। कोई भी रिफंड एक हजार से अधिक का नहीं हैं। शायद इसलिए उनकी हार्डकॉपी भी जमा नहीं कराई गई। फिलहाल सभी मामलों में नोटिस जारी कर हार्डकॉपी जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं। फिर भी कुछ नहीं हुआ, तो 15 दिन बाद मुख्यालय से निर्देश लेकर उन्हें निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।

म श्किल है क्लेम:

जीएसटी के जानकार बताते हैं कि एक हजार से कम के रिफंड के लिए क्लेम होना मुश्किल ही लगता है। व्यापारी को क्लेम लेने के लिए इससे ज्यादा रकम फीस आदि में चुकानी पड़ेगी।

रिफंड निस्तारण की स्थिति:

-846 मामले आए हैं रिफंड के, जिनका मूल्य 80 करोड़ 36 लाख है।

-564 मामले में हार्डकॉपी जमा करा दी गई है, जिनके रिफंड की कीमत 77 करोड़ 19 लाख है।

-452 मामलों में विभाग ने 62 करोड़ रुपये रिफंड किया।

-15 करोड़ के 112 मामले लंबित हैं।

-500 नोटिस जारी किए हैं विभाग ने अब तक।

-45 करोड़ 77 लाख का भुगतान अब तक ट्रेजरी से किया जा चुका है।

Posted By: Jagran