आगरा, जागरण संवाददाता। आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) में संपत्तियों की नीलामी में फर्जी नाम-पते से आवंटन हासिल करने की कोशिशों का मामला सामने आया है। एक ही व्यक्ति द्वारा अलग-अलग लोगों के नाम से कभी फर्जी वसीयत से कभी अन्य तरीकों से संपत्ति अपने नाम करने का प्रयास किया। मामला संज्ञान में आने पर एडीए ने जांच के बाद खंदारी के गणपति अपार्टमेंट निवासी हीरालाल अग्रवाल के खिलाफ हरीपर्वत थाने में दो मुकदमे दर्ज कराए हैं। आरोपित ने एडीए के एक कर्मचारी के घर पर जाकर उसे लालच और धमकी भी दी।

पहला मुकदमा एडीए लिपिक राजीव सक्सेना ने धमकी देने, धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। जबकि दूसरा मुकदमा लिपिक नासिर हुसैन ने फर्जी वसीयत से हड़पने का प्रयास किया। मामले के अनुसार विकास प्राधिकरण ने केदार नगर योजना में भवन संख्या एमआइजी 150 का आवंटन कृष्णा सक्सेना के पक्ष में किया 25 अक्टूबर 1983 को किया गया था।

आवंटी द्वारा उक्त भवन का मुख्तारनामा राधेश्याम शर्मा पुत्र मथुरा प्रसाद के पक्ष में 12 जनवरी 1984 को किया गया था। इसी दौरान गणपति टावर खंदारी हीरालाल अग्रवाल ने अपंजीकृत वसीयत अपने प्रार्थना पत्र के साथ संलग्न कर नामांकन कराने की मांग की। एडीए ने हीरालाल अग्रवाल द्वारा प्रस्तुत वसीयत में कृष्णा सक्सेना के हस्ताक्षर का अपने रिकार्ड से मिलान किया तो वह मेल नहीं खाए।

जांच में सामने आए आरोपित के ये खेल

-आरोपित ने टीपी नगर सेक्टर चार के अंर्तगत भूखंड संख्या 57 के अभिलेखों मुरारीलाल पुत्र मूलचंद और जगतराम पुत्र ताराचंद द्वारा बैनामे के आधार पर नामांकन कराए जाने हेतु आनलाइन आवेदन किया था। जिसकी विज्ञप्ति प्रकाशित हुई, नामांकन के संबंध में एक फर्जी आपत्तिकर्ता किशन सिंह निवासी गणपति अपार्टमेंट के नाम से की गई। एडीए ने जांच में पाया कि इस नाम का कोई व्यक्ति उक्त पते पर नहीं रहता था। उक्त पता व मोबाइल नंबर हीरालाल अग्रवाल का था।

-आरोपित हीरालाल अग्रवाल ने जवाहरपुरम योजना के भूखंड 134 के समायोजन के लिए प्रार्थना पत्र मंजुला त्रिपाठी निवासी गणपति टावर खंदारी के फर्जी नाम-पते से प्रेषित किया गया।

-ताजनगरी योजना द्वितीय में भूखंड का आवंटन छीतर सिंह निवासी बसई खुर्द ताजगंज के पक्ष में किया गया। जिसमें छीतर सिंह ने वर्तमान पता गणपति टावर खंदारी दर्शाते हुए एडीए के संयुक्त सचिच को प्रेषित किया था। दिए गए मोबाइल नंबर की जांच की तो वह हीरालाल अग्रवाल का निकला। आरोपित ने छीतरमल के फर्जी हस्ताक्षर कर एडीए में पत्र प्रेषित किया था।

Edited By: Prateek Gupta