आगरा, जागरण संवाददाता। दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में गुरुवार को 10 दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला अनुपम प्रस्तर सृजनोत्सव का समापन हुआ। इस कार्यशाला में देश के विभिन्न प्रदेशों से आए पांच प्रमुख कलाकारों ने अपने अमूर्त विचारों को अपनी रचनात्मक सृजनशीलता से मूर्त रूप में प्रस्तुत किया।

त्रिसूर केरल से सानुल कन्ननकुलंगरा ने प्रकृति की विरासत को सहेजने का संदेश दिया। अपनी कृति के माध्यम से उन्होंने प्रकृति में रहने वाले सबसे छोटे जीव तथा मानव के मध्य समन्वय को प्रदर्शित किया। बड़ोदरा, गुजरात के दीपक रसैली ने प्रस्तर(पत्थर) के मूल गुणों को ध्यान में रखते हुए पृथ्वी और आकाश का भावनात्मक संयोजन प्रस्तुत किया, जिसमें क्षितिज रेखा के रूप में दो प्रस्तरों के मध्य रिक्त स्थान को अत्यंत कलापूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया। चंडीगढ़ की सोनिका मान ने विजडम शीर्षक से अपने कला को प्रस्तुत किया। उन्होंने मनुष्य की विवेक शक्ति एवं उसके न्याय पूर्ण उपयोग जैसे अमूर्त विचार को कठोर प्रस्तर पर उतारा। जालंधर के योगेश कुमार प्रजापति ने भी जीवन में शिक्षा के महत्व एवं उसके उपयोग तथा दुरुपयोग पर अपने शिल्प में केरिकेचर प्रभाव उत्पन्न किया। जालंधर के ही कलाकार श्याम कुमार रावत ने दो पत्थरों को आपस में सुंदर रूप से संयोजित कर प्रकृति के प्रति अपने प्रेम को प्रदर्शित किया। कलाकारों के साथ छात्रों ने भी अपनी रचनात्मकता को पत्थरों पर उकेरा। समापन के अवसर पर संस्थान के कुलपति प्रो. आनंद मोहन ने अतिथियों का सम्मान किया। अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. जेके वर्मा ने सहयोगी कलाकारों को स्मृति चिन्ह प्रदान किए। डा. नमिता त्यागी, डा. सोनिका,अमित जौहरी,डा. मीनाक्षी ठाकुर आदि ने सहयोग किया।

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