आगरा, जागरण संवाददाता। मैनपुरी के गणेशपुर में खेत के समतलीकरण में मिले हथियारों में 97 प्रतिशत तक कॉपर है। उन्हें मजबूत बनाने को अन्य धातुओं का भी प्रयोग किया गया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) इनका डाक्यूमेंटेशन करने के साथ ही जांच में जुटा हुआ है। डाक्यूमेंटेशन का काम पूरा होने के बाद ताम्र निधियों को सफाई के लिए एएसआइ की रसायन शाखा को भेजा जाएगा।

मैनपुरी के कुरावली के गणेशपुर में बहादुर सिंह फौजी के खेत में टीले के समतलीकरण के दौरान 77 ताम्र निधियां मिली थीं। इनमें भाले, तलवारें, खंजर व मानव आकृतियां प्रमुख हैं। एएसआइ की टीम उन्हें आगरा ले आई थी। खेत में एक सप्ताह से अधिक समय तक एएसआइ द्वारा किए गए अध्ययन में गेरुए रंग के मृद्भांड (ओसीपी) के टुकड़े और बर्तन पकाने वाली दो भट्टियां मिली थीं। खेत में मिले हथियारों में चार धार वाला भाला (फोर एज्ड बार्ब्ड स्फियर हैड) और करीब एक मीटर लंबी तलवार प्रमुख हैं।

एएसआइ के विशेषज्ञ गणेशपुर में प्राचीन मानव सभ्यता होने का अनुमान लगा रहे हैं। हथियारों के करीब 3800 से चार हजार वर्ष पुराना होने का अनुमान है। हथियारों में कापर के अलावा अन्य कौन-सी धातुएं प्रयोग में लाई गई थीं, इसका पता लगाने को अध्ययन किया जा रहा है। गणेशपुर में उत्खनन कर विस्तृत जांच किए जाने पर भारतीय इतिहास का गौरवपूर्ण कालक्रम सामने आ सकता है।

अधीक्षण पुरातत्वविद् डा. राजकुमार पटेल ने बताया कि मैनपुरी में मिले हथियारों में 97 प्रतिशत कॉपर है। अन्य धातुओं के बारे में जानकारी को ताम्र निधियों के डाक्यूमेंटेशन के साथ विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है।

मैटलर्जी स्टडी व टाइपोलाजी से मिलेगी जानकारी

यह जरूरी नहीं है कि हथियारों को इस्तेमाल करने वालों ने ही उनका निर्माण किया हो। मैनपुरी में मिले हथियारों की मैटलर्जी (धातुकर्म) स्टडी और टाइपोलाजी के आधार पर ही यह पता चल सकेगा कि हथियारों के निर्माण में कहां से निकली धातु का उपयोग किया गया था। गंगा घाटी की सभ्यता में कापर की खदानें नहीं मिली हैं। उत्तराखंड, राजस्थान, झारखंड और खेतड़ी में कॉपर की खदानें हैं। 

Edited By: Prateek Gupta