आगरा, जागरण संवाददाता। आखिरकार वबाग कंपनी की नींद टूट ही गई है। दयालबाग की सौ फुटा रोड पर हुए गड्ढे को भरने के लिए कंपनी के कर्मचारी पहुंच गए हैं और मरम्मत का काम शुरू कर कर दिया है। जेसीबी की मदद से गड्ढे को भरा जा रहा है। सोमवार को मंडलायुक्त अमित गुप्ता ने कमिश्नरी में इसे लेकर बैठक की थी। गड्ढा न भरने पर भड़क गए और वबाग कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के आदेश दिए थे। शाम को जल संस्थान के महाप्रबंधक आरएस यादव ने प्रोजेक्ट मैनेजर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। जिसके बाद बुधवार को वबाग कंपनी के कर्मचारी गड्ढा भरने पहुंच गए। 

वहीं नगरायुक्त निखिल टीकाराम ने कंपनी पर 40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माना की राशि की कटौती के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। दयालबाग निवासी चिराग अपनी पत्नी श्वेता के साथ क्रेटा गाड़ी से 29 जुलाई की रात 11 बजे आइसक्रीम खाने जा रहे थे। एचडीएफसी बैंक के सामने जैसे ही गाड़ी पहुंचे तेज आवाज के साथ रोड धंस गई। गाड़ी का बायां टायर फट गया। 30 जुलाई को क्षेत्रीय लोगों ने नाराजगी जताई और गड्ढे की मरम्मत की मांग की। ट्रैफिक पुलिस ने दयालबाग रोड की एक लेन को बंद कर दिया था। वबाग कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर ने 31 जुलाई को गाजियाबाद से विशेष टीम आने की बात कही लेकिन कोई टीम नहीं पहुंची। एक अगस्त को भी यही बात दोहराई गई। सोमवार दोपहर तक गड्ढे की मरम्मत नहीं हुई। इस पर मंडलायुक्त अमित गुप्ता ने कमिश्नरी में नगर निगम, जल निगम, वबाग कंपनी और जल संस्थान के अफसरों के साथ बैठक की। गड्ढे क्यों नहीं भरा गया है, इसे लेकर कंपनी के अफसरों से सवाल पूछा गया तो वह सटीक जवाब नहीं दे सके। इसी तरह से सीवर समस्या और पांच करोड़ रुपये से विकास कार्य कराने को लेकर सवाल पूछे गए। ठीक से कार्य न करने और शिकायतों को नजरअंदाज करने पर मंडलायुक्त भड़क गए। उन्होंने कहा कि जो भी कार्य किए जा रहे हैं। उनकी रिपोर्ट भेजी जाए। कंट्रोल रूम को ठीक तरीके से सक्रिय किया जाए।

दो माह पूर्व धंसी रोड 

सौ फुटा रोड दयालबाग से होकर पानी और सीवर की लाइन गुजरी है। जल निगम ने तीन साल पूर्व पानी और दो साल पूर्व सीवार लाइन बिछाई गई थी। एचडीएफसी बैंक से कुछ दूरी पर दो माह पूर्व रोड धंस गई थी।

जनता से धोखा कर रही है वबाग कंपनी 

नगरायुक्त निखिल टीकाराम का कहना है कि वबाग कंपनी जनता के साथ धोखा कर रही है। इससे नगर निगम की छवि धूमिल हो रही है। कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। 40 लाख रुपये का जुर्माना भी लगा है। कंपनी द्वारा ठीक से कार्य न करने की रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है। बैठक में नगरायुक्त निखिल टीकाराम, जल संस्थान के महाप्रबंधक आरएस यादव मौजूद रहे।

43 करोड़ रुपये सालाना का होता है भुगतान 

नगर निगम और वबाग कंपनी के बीच डेढ़ साल पूर्व सीवर लाइन की सफाई, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और पंपिंग स्टेशन की देखभाल को लेकर करार हुआ था। यह दस साल के लिए था। इससे पूर्व सीवर समस्या का समाधान जल संस्थान और प्लांट और स्टेशन का रखरखाव जल निगम द्वारा किया जाता था। निगम को हर साल वबाग कंपनी को 43 करोड़ रुपये का भुगतान करना था। वहीं कंपनी को पांच करोड़ रुपये के विकास कार्य कराने थे।

हर दिन पहुंचती हैं 150 शिकायतें 

सीवर समस्या को लेकर हर दिन नगर निगम, जल संस्थान और वबाग कंपनी के पास हर दिन 150 शिकायतें पहुंचती हैं। 30 से 40 फीसद शिकायतों का निस्तारण किया जाता है।

 

Edited By: Tanu Gupta