आगरा, जागरण संवाददाता। धरती की प्यास बुझाने और पीने से लेकर सिंचाई के लिए जल उपलब्ध कराने को रबर डैम के लिए चार वर्ष से प्रयास हो रहे हैं। इसके लिए छह एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) की आवश्यकता है, जिसमें से अब तक के प्रयास के बाद तीन एनओसी मिल गई हैं, लेकिन अब दो एनओसी और लेनी होगी। शुक्रवार को हुई ताज ट्रिपेजियम जोन की समिति की बैठक में निर्णय हुआ है कि सुप्रीम कोर्ट की निर्देशों का पालन करते हुए नेशनल एंवायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) और सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) की एनओसी भी लेनी होगी।

शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक जलसंकट विकराल रूप ले रहा है और 15 में से 12 ब्लाक डार्क जोन में आ गए हैं। आगरा में बैराज और रबर डैम की मांग तीन दशक पुरानी है, लेकिन सफलता नहीं मिल पा रही है। सूबे में योगी सरकार बनी तो उसके बाद ताजगंज स्थित नगला पैमा में रबर डैम प्रस्तावित हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद इसका शिलान्यास करके गए थे। इसके लिए ताज बैराज खंड ने केंद्रीय जल आयोग, ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड), अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) और केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय में एनओसी के लिए आवेदन किया था। इनमें से केंद्रीय जल आयोग, अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण और एएसआई ने एनओसी दे दी है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, एनजीटी और टीटीजेड से स्वीकृति मिलना अभी बाकी है। अब दो और एनओसी ताज बैराज खंड को होनी होगी, जिसमें नीरी और सीईसी सम्मिलित है। शुक्रवार ताज बैराज खंड और संबंधित विभागों की जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह की मौजूदगी में हुई बैठक में दोनों एनओसी लेने का निर्णय लिया गया। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता शरद सौरभ गिरी ने बताया कि अब रबर डैम के लिए कुल आठ एनओसी हो गई हैं। इसमें से तीन क्लियर हो चुकी है, तीन प्रक्रिया में हैं और दो के लिए आवेदन किया जाएगा।

कई बार हुए हैं बदलाव

यमुना पर बैराज निर्माण के लिए तीन दशक पहले प्रक्रिया शुरू हुई। राजनीतिक और दूसरे कारणों से ये लंबित होता चला गया। कई बार बैराज और रबर डैम को लेकर बदलाव हुए। वर्ष 2016 में प्रस्तावित स्थल पर ही रबर डैम की योजना तैयार की गई थी। तब सिंचाई विभाग के तत्कालीन अधिकारी दूसरे देशों में रबर डैम देखकर भी आए थे। वर्ष 2017 में भाजपा की सरकार बनी, जिसके बाद ताज बैराज की संस्तुति दी गई। कुछ महीनों बाद ही इस योजना में एक बार फिर से बदलाव हुआ। वर्तमान में रबर डैम निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। 

Edited By: Tanu Gupta