आगरा, जागरण संवाददाता। कोरोना काल में पर्यटन गतिविधियों पर विराम लगने के साथ ही पर्यटन व उससे जुड़े कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो उठे हैं। टूरिस्ट ट्रांसपोर्ट से जुड़े कारोबारियों के पास काम नहीं होने से आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। बैंक ऋण की किस्त, वाहनों का टैक्स व बीमा आदि के भुगतान के लिए कारोबारियों द्वारा सरकार से रियायत मांगी जा रही है।

अागरा में पर्यटन प्रमुख कारोबार में शुमार है। इस पर करीब पांच लाख लोग प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से आश्रित हैं। मार्च, 2020 में देश में कोरोना के दस्तक देने के साथ ही पर्यटन कारोबार प्रभावित हो गया था। तब से यह उबर नहीं सका है। जब तक स्मारक खुले हुए थे, तब तक भारतीय पर्यटकों के भरोसे कुछ काम चल रहा था। 16 अप्रैल से स्मारक बंद होने के साथ ही यह एक बार फिर ठप हो गया है। इससे टूरिस्ट ट्रांसपोर्ट कारोबार के भी एक बार फिर बुरे दिन शुरू हो गए हैं। टूरिस्ट ट्रांसपोर्ट का काम करने वाले खाली बैठे हैं और उनके पास कोई काम नहीं है। एक वर्ष से अधिक समय से कारोबार की स्थिति खराब होने से वो भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। उन्हें खड़ी गाड़ियों पर भी टैक्स, बीमा आदि देना पड़ रहा है। इस स्थिति में वो वाहनों के प्रपत्रों की वैधता बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

ताजमहल बंद होने से पर्यटन लगभग ठप है। टूरिस्ट ट्रांसपोर्ट कारोबार को बचाने के लिए सरकार को बैंक ऋण की किस्त चुकाने को तीन माह का समय देना चाहिए। वाहनों का टैक्स व बीमा माफ किया जाए। वाहनों के प्रपत्रों की वैधता भी तीन माह बढ़ानी चाहिए।

-निखिल गर्ग, अध्यक्ष आल इंडिया फेडरेशन आफ टूरिस्ट ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन, आगरा

मार्च, 2020 से ही पर्यटन कारोबार बुरी तरह प्रभावित है। कोरोना वायरस का संक्रमण बढ़ने के बाद स्मारकों को बंद किए जाने से पर्यटन संबंधित सभी गतिविधियां ठप हो चुकी हैं। सरकार को टैक्स, बीमा आदि में ट्रेड से जुड़े लोगों को राहत देनी चाहिए।

-सुमित उपाध्याय, टूर आपरेटर्स 

Edited By: Prateek Gupta