आगरा, अम्बुज उपाध्याय। नहरें सूखी पड़ी हुई हैं और जिनमें पानी है वह टेल तक नहीं पहुंच पा रहा है। भूगर्भ जलस्तर गिरता जा रहा है। इजाफे के लिए रबर डैम, बैराज की आस में दशकों से प्रयास हो रहे हैं, लेकिन निराशा ही हाथ आ रही है। बारिश के दिनों में यमुना में भरपूर पानी आता है और बह कर चला जाता है। धरती की प्यास बुझे, यमुना में भरपूर पानी की उपलब्धता रहे और सिंचाई का संकट भी दूर हो इसके लिए चार वर्ष पहले एक बार फिर रबर डैम निर्माण के प्रयास शुरू हुए, लेकिन तीन एनओसी की आस में ये अटका हुआ है।

आगरा में बैराज और रबर डैम की मांग तीन दशक पुरानी है। सूबे में योगी सरकार बनी तो उसके बाद ताजगंज स्थित नगला पैमा में रबर चेक डैम प्रस्तावित हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद इसका शिलान्यास करके गए थे। इसके लिए ताज बैराज खंड ने केंद्रीय जल आयोग, ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड), अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) और केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय में एनओसी के लिए आवेदन किया था। इनमें से केंद्रीय जल आयोग, अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण और एएसआई ने एनओसी दे दी है। अभी केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, एनजीटी और टीटीजेड से स्वीकृति मिलना अभी बाकी है। बारिश के दिनों में गोकुल बैराज से जितना पानी छोड़ा जाता है, वह बह कर आगे निकल जाता है। ऐसे में कैलाश मंदिर से नगला पैमा तक यमुना सूखी दिखाई देती है। यहां यमुना में पानी कम और सिल्ट ज्यादा नजर आती है। रबर डैम बनने से यमुना में 3.5 लाख क्यूसेक पानी रोका जा सकेगा, जिससे आगरा का भूगर्भ जलस्तर बढ़ेगा। इससे पर्यटकों को ताजमहल के पीछे मोहक दृश्य दिखाई देगा तो जलसंकट से जूझती फसलों, शहर को भरपूर पानी की उपलब्धता रहेगी।

कई बार हुए बदलाव

यमुना पर सबसे पहले बैराज निर्माण के लिए तीन दशक पहले प्रक्रिया शुरू हुई। राजनीतिक और दूसरे कारणों से ये लंबित होता चला गया। कई बार बैराज और रबर डैम को लेकर बदलाव हुए। वर्ष 2016 में प्रस्तावित स्थल पर ही रबर डैम की योजना तैयार की गई थी। तब सिंचाई विभाग के तत्कालीन अधिकारी दूसरे देशों में रबर डैम देखकर भी आए थे। वर्ष 2017 में भाजपा की सरकार बनी, जिसके बाद ताज बैराज की संस्तुति दी गई। कुछ महीनों बाद ही इस योजना में एक बार फिर से बदलाव हुआ। वर्तमान में रबर डैम निर्माण की प्रक्रिया चल रही है।

ये है आंकड़ा

- 2.83 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है।

- 72,000 हेक्टेयर में आलू उत्पादन होता है।

- 1,32,000 हेक्टेयर में गेहूं उत्पादन होता है।

- 62,000 हेक्टेयर में सरसों उत्पादन होता है।

- 1,15,000 हेक्टेयर में बाजरा उत्पादन होता है।

- 5,200 हेक्टेयर में धान उत्पादन होता है। 

Edited By: Tanu Gupta