आगरा, जागरण संवाददाता। जोंस मिल संघर्ष समिति के बैनर तले मंगलवार को जीवनी मंडी स्थित जन्नत होटल में बैठक आयोजित कर जिला प्रशासन की एक पक्षीय उत्पीड़नात्मक कार्रवाई के खिलाफ संघर्ष की रणनीति बनाई गई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारियों से बात की गई। जल्दी ही संघर्ष समिति की पीड़ा और जिला प्रशासन की हठधर्मिता राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के उच्च अधिकारियों तक पहुंचेगी।

समिति के संरक्षक बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि आखिर हमारा क्या कसूर है? हमारे पास वैध बेनामे हैं। बाकायदा हमने स्टांप अदा कर रजिस्ट्री कराई हैं। गृह कर और जलकर नियमित अदा कर रहे हैं। इन जमीनों पर बैंक अधिकारियों ने ऋण भी दिए हैं। नगर निगम सहित सभी राज्य अभिलेखों में इस भूमि का स्वामित्व सरकार के नाम नहीं है। कोर्ट के स्टे आर्डर भी चल रहे हैं। इन जगहों की पहले भी जिला प्रशासन जांच करके यह पुष्टि कर चुका है कि हमारे कागज बिल्कुल ठीक हैं। इसके बावजूद वर्तमान जिला प्रशासन हम व्यापारियों और क्षेत्रीय निवासियों को गलत ठहराने पर आमादा है। इसके खिलाफ शीघ्र ही बड़ा जन आंदोलन खड़ा किया जाएगा।

डाली आरटीआई

बृजमोहन अग्रवाल ने बताया कि बैठक में सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय के अनुसार वकीलों द्वारा उत्तर प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को आरटीआई डलवाई गई है और आरटीआई के माध्यम से यह पूछा गया है कि जमीन खरीदते समय एक ग्राहक को क्या-क्या दस्तावेज देखने चाहिए?

खल रहा जनप्रतिनिधियों का मौन

बैठक में इस बात पर कड़ा आक्रोश व्यक्त किया गया कि आगरा में नौ विधायक, एक महापौर और अब हरिद्वार दुबे जी को राज्यसभा सदस्य बनाने के बाद तीन सांसद भारतीय जनता पार्टी के हैं और जोंस मिल संघर्ष समिति से जुड़े सभी लोग भाजपा के समर्थक हैं, इसके बावजूद जनप्रतिनिधि व्यापारियों और क्षेत्रीय लोगों की पीड़ा के संबंध में प्रशासन से एकजुट होकर क्यों बात नहीं कर रहे हैं? जनप्रतिनिधियों का मौन संघर्ष समिति को खल रहा है।

ये रहे शामिल

बैठक में संरक्षक बृजमोहन अग्रवाल, अतुल बंसल, प्रमोद अग्रवाल, उमा माहेश्वरी, दयानंद नागरानी, अनिल जैन, अमित अग्रवाल, विशाल बंसल, पंकज बंसल, अशोक अग्रवाल, हर्ष गुप्ता, मनोज अग्रवाल, मनीष नागरानी और अरुण गुप्ता प्रमुख रूप से मौजूद रहे। 

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