आगरा, जागरण संवाददाता । बेसिक शिक्षा परिषद में 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती में 31277 पदों पर विद्यालय आवंटन की प्रक्रिया 29 अक्टूबर से शुरू होने जा रही है। इसमें जिले में तैनाती पाने वाले 580 अभ्यर्थियों को प्राथमिकता के आधार पर शिक्षक विहीन या एकल विद्यालय आवंटित किए जाएंगे। हालांकि यह नई बात नहीं होगी, हर नियुक्ति प्रक्रिया में शिक्षकों की कमी का संकट खत्म करने की कवायद की जाती है, लेकिन कुछ दिन बाद नतीजा वहीं पुराने जैसा हो जाता है।

वर्ष 2010 से लेकर 2020 तक की बात करें तो बेसिक शिक्षा परिषद करीब 10 बार नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर चुकी है और जिले को करीब छह हजार से ज्यादा शिक्षक मिले हैं। हर नियुक्ति में अमूमन पांच सौ से सात सौ शिक्षक जिले को आवंटित किए जाते रहे हैं। इस बार भी 31277 में से 674 अभ्यर्थी आवंटित किए गए थे, जिनमें से 611 ने काउंसलिग कराई, उनमें से पात्र मिले 580 को नियुक्ति पत्र जारी करते हुए ज्वाइंनिग करा ली गई है। अब 29 अक्टूबर से उन्हें विद्यालय आवंटन के लिए काउंसिलिग भी शुरू हो रही है। लिहाजा इस बार भी जिले के करीब 150 शिक्षक विहीन और 400 एकल विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर करने की कोशिश होगी। ऐसे बनती है पुरानी स्थिति

शिक्षक विहीन व एकल विद्यालय जिले में दूरदराज और अंदरूनी इलाकों में हैं, जहां तक पहुंचना सामान्यत: थोड़ा कठिन होता है। शुरुआत में नौकरी लगने पर शिक्षक जोश और उत्साह में कुछ दिन तो वहां पहुंचते हैं, लेकिन जब समस्या आती है तो तबादले की कोशिश में जुट जाते हैं। हालांकि फिलहाल जिले के अंदर तबादले बंद हैं और अंतर जनपदीय के लिए आनलाइन औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं। ऐसे में विभागीय सांठगांठ से पहले शिक्षक निलंबित होते हैं और फिर पास के जिले में संबद्धता कराकर मूल तैनाती वाले जिले से निजात पा लेते हैं। हालांकि राज्यपाल की सख्ती के बाद अब संबद्धता की कहानी पर भी नकेल कस गई है। अब निलंबन पर भी मूल विद्यालय में ही संबद्धता की जाने लगी है। ऐसे में इस बार मूल तैनाती वाले विद्यालय से निजात पाना आसान नहीं होगा। सक्रिय है जुगाड़ तंत्र

सहायक अध्यापकों को विद्यालय आवंटन काउंसिलिग 29 अक्टूबर से शुरू होगी, लेकिन मनचाहा विद्यालय दिलाने के लिए जुगाड़ तंत्र सक्रिय हो गया है। हालांकि च्वाइस फिलिग का विकल्प सिर्फ दिव्यांग और महिला अभ्यर्थियों को ही दिया गया है, लेकिन नजदीक के ब्लाक और यातायात संपर्क वाले विद्यालय में नियुक्ति पाने को पुरुष अभ्यर्थी भी जुगाड़ साधने में लगे हैं।

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