जागरण संवाददाता, आगरा: शहर के सबसे सनसनीखेज हत्याकांड की जांच की कमान सीबीआइ (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) ने संभाल ली है। बुधवार को देर शाम नौ सदस्यीय टीम ने शहर पहुंचकर डेरा जमा लिया। गुरुवार को टीम घटनास्थल पर जांच के लिए पहुंच सकती है।

डीईआइ (दयालबाग शिक्षण संस्थान) की नैनो बायो टेक्नोलॉजी लैब में 15 मार्च की शाम को शोध छात्रा की निर्मम हत्या कर दी गई थी। सनसनीखेज हत्याकांड के 38वें दिन पुलिस ने परिस्थिति जन्य और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर डीईआइ के अध्यक्ष प्रेम कुमार के धेवते उदयस्वरूप और लैब टेक्नीशियन यशवीर सिंह संधू को गिरफ्तार कर हत्याकांड का खुलासा किया था। इसके बाद भी हत्याकांड की गुत्थियां नहीं सुलझी थीं। छात्रा के पिता की अर्जी पर शासन स्तर से हत्याकांड की जांच 22 जुलाई को सीबीआइ को स्थानांतरित कर दी गई। हत्याकांड से संबंधित जानकारी तलब करने के बाद सीबीआइ की टीम बुधवार को शहर पहुंच गई।

एसपी के नेतृत्व में आई इस टीम में एक डिप्टी एसपी और तीन इंस्पेक्टर शामिल हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक टीम गुरुवार को घटना स्थल पर पहुंचकर जांच कर सकती है। टीम पुलिस की केस डायरी में सामने आए चश्मदीद और छात्रा के पिता के भी बयान ले सकती है।

ये रहा घटना क्रम

- 15 मार्च- डीईआइ की शोध छात्रा की निर्मम हत्या कर दी गई। छात्रा की कार खेलगांव के पास सड़क पर लावारिस खड़ी मिली।

- 16 मार्च- कार के पास बाउंड्रीवाल में लैपटॉप बैग और 17 मार्च को लैब से पंद्रह कदम की दूरी पर लैपटॉप मिला।

- 31 मार्च- फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर सघन जांच की।

22 अप्रैल- परिस्थितिजन्य और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर उदयस्वरूप और यशवीर सिंह संधू को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर पुलिस ने जेल भेज दिया।

30 अप्रैल- हत्यारोपियों को 48 घंटे की पुलिस रिमांड पर लिया, लेकिन पुलिस मुंह तक नहीं खुलवा सकी।

12 जुलाई - पुलिस की केस डायरी में हत्याकांड का चश्मदीद सामने आया।

15 जुलाई- हत्योरोपियों की सत्र न्यायालय से जमानत खारिज।

18 जुलाई- पुलिस ने दोनों हत्यारोपियों के खिलाफ चार्जशीट लगा दी।

22 जुलाई- शोध छात्रा की पिता के प्रार्थनापत्र पर शासन ने केस सीबीआइ को स्थानांतरित कर दिया।

ये गुत्थी उलझी

- शोध छात्रा की हत्या से पहले उनकी कार कहां खड़ी थी और बाहर तक कौन ले गया?

- शोध छात्रा की मां को फोन कर छात्रा के सदर जाने की कहने वाला शख्स कौन था?

- छात्रा की गायब पैन ड्राइव कहां गई?

- शोध छात्रा की हत्या केवल दो हत्यारोपियों ने ही की थी या इसमें और भी कुछ लोग शामिल थे?

- शोध छात्रा की गाइड अमला चोपड़ा की चुप्पी का राज क्या है?

पुलिस ने इन बिंदुओं पर किया खुलासा

- उदयस्वरूप लैब में अक्सर आता था और उसके पास लैब की तीसरी चाबी थी।

- कई बार वह छात्रा पर कमेंट कर चुका था। छात्रा ने इसकी शिकायत गाइड से भी की थी।

- शोध छात्रा की हत्या के कुछ देर बाद उदयस्वरूप घबराया हुआ था। अपने फ्रेंड के पास जाकर उसने उल्टी भी की थी।

- मोबाइल में एसएमएस मिलना और छात्रा के भाई और बहन से शोध छात्रा के बारे में कमेंट करना।

- घटना स्थल पर मिले बाल उदयस्वरूप के बालों से मैच होना।

आरोपी पक्ष की दलील

आरोपी पक्ष का कहना है कि पुलिस ने उनके खिलाफ सबूतों के अभाव में भी उन्हें जेल भेज दिया। मीडिया और जन दबाव के चलते पुलिस ने जल्दबाजी में गलत किया है।

पुलिस ने खराब किया केस

शोध छात्रा के पिता का कहना है कि पुलिस ने जांच में तमाम कमियां छोड़ी हैं। अपनी गर्दन बचाने को पुलिस ने केस को खराब कर दिया। अब आरोपी सीबीआइ जांच से पहले कोर्ट से निकलने की फिराक में हैं। उनका कहना है कि जब तक न्याय न मिले, तब तक आरोपियों को जमानत नहीं मिलनी चाहिए। बाहर निकलकर वे सुबूतों से छेड़छाड़ करेंगे।

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