जागरण संवाददाता, आगरा:

अनुशासन के लिए देश में अलग पहचान रखने वाले दयालबाग शिक्षण संस्थान में शोध छात्रा की नृशंस हत्या को लेकर शनिवार को आक्रोश फूट पड़ा। संस्थान के सैकड़ों छात्र-छात्राएं काली पट्टी बांध, वी वांट जस्टिस के नारे लगाते हुए सड़क पर उतर आए। विद्रोह की मशाल लेकर जब छात्राएं आगे बढ़ीं, तो पुलिस को भी पसीना आ गया। लगभग तीन घंटे तक चले हंगामे के बाद छात्र-छात्राओं को किसी तरह मनाया गया। मगर संस्थान में पढ़ाई पूरे दिन ठप रही और परीक्षाएं निरस्त कर दी गई। उधर, डॉक्टरों के पैनल ने शव का पोस्टमार्टम किया, जिसमें फिलहाल दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई है। चौबीस घंटे बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं।

डीईआइ में नैनो बायोटेक्नोलॉजी में शोध कर रही 25 वर्षीय छात्रा की शुक्रवार शाम संस्थान की प्रयोगशाला के अंदर हत्या कर दी गई थी। उसके शरीर पर पेपर कटर से करीब दो दर्जन वार किए गए थे। हत्याकांड के बाद भी डीईआइ प्रशासन ने संस्थान के अवकाश की घोषणा नहीं की और न ही मामले को लेकर कोई शोक जताया। शनिवार से शुरू होने वाली परीक्षाओं को भी स्थगित नहीं किया। छात्राओं का आरोप यह भी था कि फैकल्टी द्वारा उनसे क्लास में बैठने के बदले में बीस मा‌र्क्स देने का प्रलोभन दिया गया। इसको लेकर कॉलेज खुलने के समय सुबह दस बजे ही छात्राओं में आक्रोश भड़क गया।

भाजपा पार्षद डॉ. कुंदनिका शर्मा व महिला संगठनों की अन्य पदाधिकारियों के नेतृत्व में सैकड़ों छात्र-छात्राएं सड़क पर उतर आए, जिससे पूरा दयालबाग मार्ग जाम हो गया। एसपी सिटी पवन कुमार ने फोर्स के साथ कई बार उन्हें बीच में रोकने का प्रयास किया, लेकिन वी वांट जस्टिस के नारे लगाते हुए आगे चल रही आक्रोशित छात्राएं बाधाओं को तोड़कर बढ़ती रहीं। उन्होंने अपने हाथों में वी वांट जस्टिस और नंबर नहीं न्याय चाहिए लिखी तख्तियां ले रखीं थी। इसके बाद पुलिस ने न्यू आगरा थाने के सामने रस्सी बांधकर छात्र-छात्राओं को रोक लिया। पुलिस से झड़प के बाद करीब साढ़े ग्यारह बजे न्यू आगरा थाने के सामने ही छात्र-छात्राएं धरने पर बैठ गए। इससे भगवान टॉकीज के सर्विस रोड से एमजी रोड तक जाम की स्थिति बन गई।

इसके बाद पुलिस प्रशासन के अधिकारी शहर भर के फोर्स के साथ पहुंच गए, परंतु हंगामा शांत नहीं हुआ। करीब तीन घंटे बाद एसएसपी सुभाष चंद्र दुबे ने मामले के जल्द खुलासे और संस्थान में सुरक्षा सहित अन्य मांगों को पूरा कराने का आश्वासन दिया। तब जाकर प्रदर्शन खत्म हो पाया।

सूत्रों के मुताबिक पोस्टमार्टम में शोध छात्रा के शरीर पर दो दर्जन से ज्यादा वार होने की बात सामने आई है। माना जा रहा है कि हत्यारे ने बहुत इत्मीनान से नृशंस वारदात को अंजाम दिया, वह पेपर कटर के इस्तेमाल का अभ्यस्त था और शरीर के अंदरूनी अंगों की भी उसे पूरी जानकारी थी। हालांकि पोस्टमार्टम में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई, चिकित्सकों ने इसके लिए स्लाइड सुरक्षित रख ली है। फिर शव परिजनों को सौंप दिया गया।

मूल रूप से जम्मू की थी छात्रा

शोध छात्रा मूल रूप से जम्मू के अखनूर की रहने वाली थी। उसके पिता सेना इंटेलीजेंस से रिटायर होने के बाद दिल्ली में प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं। छात्रा आठ साल से डीईआइ में पढ़ती थी। उसका परिवार दो वर्ष पूर्व आगरा में शिफ्ट हुआ था।

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